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एसएन की बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं: तीमारदारों खींच रहे स्ट्रेचर, दवाओं की भी कमी, नहीं सुधर रहे हालात

Tue, 20 Jul 2021 11:03 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

चलने-फिरने में लाचार मरीजों को डॉक्टरों तक लेकर जाने के लिए वार्ड ब्वॉय नहीं मिले,  ऐसे में तीमारदार खुद ही स्ट्रेचर को धकेल कर ले गए। 
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स्ट्रेचर खींचकर ले जाते तीमारदार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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एसएन मेडिकल कॉलेज में ओपीडी शुरू होने के सात दिन बाद भी व्यवस्थाएं नहीं सुधरी हैं। तीमारदारों को खुद ही मरीजों के स्ट्रेचर खींचने पड़ रहे हैं। त्वचा, पेट, हृदय, ईएनटी की दवाओं की कमी बनी हुई है। सोमवार को ओपीडी में 1,250 मरीज पहुंचे। चलने-फिरने में लाचार मरीजों को डॉक्टरों तक लेकर जाने के लिए वार्ड ब्वॉय नहीं मिले,  ऐसे में तीमारदार खुद ही स्ट्रेचर को धकेल कर ले गए। 11 बजे के बाद आने वालों को इलाज नहीं मिला, गेट पर ताला देखकर वह लौट गए। काउंटर पर भी अभी केवल 70 तरह की दवाएं हैं। त्वचा रोग, पेट रोग, हृदय रोग, ईएनटी रोग की दवाओं की कमी है। सोमवार को भी पर्चे पर लिखी पांच में से दो-तीन दवाएं बाजार से खरीदनी पड़ीं

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एंटीबॉयोटिक दवाएं बढ़ाई हैं
एंटीबॉयोटिक दवाएं बढ़ाई गई हैं। बरसात में चर्म रोग बढ़ जाता है, इसकी और दवाएं मंगाई जा रही हैं। व्हीलचेेयर-स्ट्रेचर बढ़ाए गए हैं, वार्ड ब्वॉय भी लगाए जा रहे हैं। - डॉ. संजय काला, प्राचार्य 

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ओपीडी परिसर में पानी भरने से हुई परेशानी
ओपीडी के रिशेप्सन हॉल के बाहर बरसात का पानी भरने से मरीजों को दिक्कत हुई। पर्चा बनवाने के लिए इसी रास्ते से जाना होता है। ईंटें रख दी गई हैं, जिस पर चलकर ही काउंटर तक पहुंच रहे हैं। 

मरीजों की पीड़ा, केवल दो दवाएं मिलीं
खुजली और एलर्जी हो गई है। डॉक्टर साहब ने पांच दवाएं लिखीं, काउंटर से दो ही दवाएं मिलीं। तीन बाजार से खरीदने को कहा। - जोत कुमार, बेलनगंज

वार्ड ब्वॉय नहीं है

पेट में पानी भर गया। मेरे साथ कोई परिजन नहीं आ पाया। चल नहीं पा रही हूं लेकिन डॉक्टर तक लेकर जाने के लिए वार्ड ब्वॉय नहीं है।  -चंदा देवी, पनवारी

धक्का-मुक्की हुई

पर्चा बनवाने के बाद घंटे भर तक लाइन में लगा रहा, फिर जाकर डॉक्टरों को दिखाया। गार्ड की कमी से धक्का-मुक्की भी झेलनी पड़ी।  -लक्ष्मीनारायण, हाथरस

महंगी दवाएं खरीदीं
डॉक्टर साहब को दिखाने के बाद चर्म रोग की दवा लेने आया था। पांच में से तीन बाजार से खरीदीं, जो सस्ती थी वे काउंटर से मिलीं।  -गोपाल बाबू, जीवनीमंडी

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