एसएन मेडिकल कॉलेज के सर्जरी एवं एलाइड स्पेशलिटी ब्लॉक के बेसमेंट में लगी आग भले ही कुछ देर में काबू कर ली गई हो। मगर, आग दूसरी मंजिलों पर फैल जाती तो क्या होता? इमारत में लगा हाईटेक फायर फाइटिंग सिस्टम काम करता या नहीं? यह कुछ सवाल घटना के बाद उठ रहे हैं। 11 महीने पहले अग्निशमन विभाग के निरीक्षण में फायर फाइटिंग सिस्टम में खामियां मिली थीं। रखरखाव में लापरवाही की जा रही थी। सिस्टम भी ठीक से कार्यरत नहीं था। विभाग ने एनओसी रिन्यू करने से पहले कमियों की तरफ एसएन प्रशासन का ध्यान खींचा था।
एसएन मेडिकल कालेज की नई बिल्डिंग वर्ष 2014 में कालेज प्रशासन को सुपुर्द की गई थी। मुख्य अग्निशमन अधिकारी अक्षय रंजन शर्मा ने बताया कि इमारत की वर्ष 2016 में एनओसी जारी की गई। बिल्डिंग के भूतल पर 1.5 लाख लीटर पानी की क्षमता का टैंक बना है। यहां पर तीन पंप भी कार्यरत हैं। इसके साथ ही आखिरी मंजिल की छत पर 25 हजार लीटर पानी की क्षमता की टंकी बनी है। यहां पर भी एक पंप लगा है। यह सभी कार्यरत हैं। हर मंजिल पर हौज पाइप लगे हैं। हाईड्रेंट प्वाइंट हैं। फायर एस्टिंगुशर भी रखे हुए हैं। आग लगने पर हाईटेक सिस्टम कार्यरत होता है। कर्मचारियों की टीम संचालन के लिए बनी है।
सीएफओ ने बताया कि हर साल निरीक्षण किया जाता है। 15 अप्रैल 2021 को भी बिल्डिंग का निरीक्षण किया गया था। तब फायर फाइटिंग सिस्टम में कुछ खामियां मिली थीं। कई जगह हौज रील टूटी हुई थी। हाईड्रेंट का पाइप फटा हुआ था। कई फायर एस्टिंगुशर की रिफलिंग नहीं हुई थी। सिस्टम सही से कार्यरत नहीं था। इस पर विभाग को पत्र लिखा गया था। इन खामियों को दूर करने के लिए कहा था। यह खामियां रखरखाव में लापरवाही से आई थीं। इस कारण तब एनओसी रिन्यू नहीं हुई थी। उधर, एसएन मेडिकल कालेज के प्रिंसिपल डॉ. प्रशांत गुप्ता का कहना है कि दर्शायी गई कमियों को दूर किया जा रहा है। इस पर कार्य चल रहा है।
शहर के 53 अस्पतालों में नहीं अग्नि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम
शहर के 53 अस्पताल बिना अग्नि सुरक्षा के इंतजाम चल रहे हैं। इनको एनओसी भी जारी नहीं हुई हैं। जनवरी में अग्निशमन विभाग ने सीएमओ को पत्र भी लिखा। मगर, अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। सीएफओ ने बताया कि कोरोना काल में अस्पतालों में आग से सुरक्षा के इंतजाम के संबंध में निरीक्षण किए गए थे। इनमें 53 अस्पताल में कमियां मिली थीं। आग से सुरक्षा के इंतजाम नहीं पाए गए थे। इस संबंध में पत्र लिखकर कमियां दूर करने के निर्देश संचालकों को दिए गए। मगर, किसी अस्पताल संचालक ने विभाग को सुरक्षा इंतजाम दुरुस्त करने के बारे में अवगत नहीं कराया। इस पर विभाग की ओर से सीएमओ को पत्र लिखा गया। पत्र में कई बड़े अस्पताल से लेकर छोटे अस्पताल भी शामिल थे। इन अस्पताल पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।