मैनपुरी। जिले में स्मॉग का असर कम नहीं हो रहा है। अफसर किसानों को पराली जलाने से रोक रहे हैं। वहीं अनफिट वाहन और कारखाने भी हवा में जहर घोल रहे हैं। प्रदूषण रोकने के लिए अनफिट वाहनों पर कार्रवाई की जरूरत है। शनिवार को जिले में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 152 रिकार्ड किया गया।
दिवाली के बाद से ही मौसम का मिजाज बिगड़ा हुआ है। जिले में सुबह से ही स्मॉग छाया रहा। इससे दमा के मरीजों की संख्या काफी बढ़ चुकी है। साथ ही खांसी, जुकाम और एलर्जी के मरीज बड़ी संख्या में इजाफा हुआ है। बढ़ते वायु प्रदूषण की चिंता आम पब्लिक के साथ ही शासन और प्रशासन को भी है।
लगातार किसानों को जागरूक किया जा रहा है कि वह खेतों में पराली न जलाएं। काफी हद तक किसानों ने भी प्रशासन का सहयोग किया है। वहीं जिले की सड़कों पर अनफिट वाहन प्रदूषण करते नजर आ रहे हैं। फिट वाहनों की तुलना में अनफिट वाहनों से अधिक धुआं निकल रहा है। कहीं न कहीं यह धुआं वातावरण और लोगों के लिए घातक है।
ऐसा नहीं है कि वाहनों को प्रदूषण फैलाने की छूट है। वाहनों के लिए भी नियम और कानून है, लेकिन अफसरों की अनदेखी से इनका पालन नहीं हो पा रहा है। वाहनों की नियमित रूप से फिटनेश करानी होती है। इसके साथ ही प्रदूषण जांच केंद्र से सर्टीफिकेट लेना होता है। निर्धारित मानक से अधिक धुआं फेंकने वाले वाहनों का चालान करने का भी नियम है।
उद्योग भी फैला रहे प्रदूषण
जिले में उद्योग से भी प्रदूषण फैल रहा है। कई जगह लगे जेनरेटर भी अनफिट होने के कारण अधिक धुआं फेंक रहे हैं। बरनाहल रोड स्थित गिट्टी प्लांट में लगी मशीन भी जमकर धुआं फेंक रही है। इसमें से निकले कार्बन-डाई-आक्साइड वातावरण को दूषित कर रहा है।
वाहनों के लिए प्रदूषण की जांच अनिवार्य है। प्रदूषण प्रमाणपत्र की व्यवस्था ऑनलाइन है, यानी बिना वाहन का प्रदूषण चेक किए प्रमाणपत्र नहीं बन सकता है। इसके साथ ही चेकिंग अभियान के दौरान अनफिट वाहनों पर कार्रवाई भी की जाती है। -राजेश कर्दम, एआरटीओ।