दलील : पता नहीं चल पाया, सड़क को ऊंचा उठा सकते हैं
जीवनी मंडी में जहां पाइप सड़क से ऊपर है, उसके ठीक नीचे पानी की और सीवर की जर्जर पुरानी पाइप लाइन पड़ी है। स्मार्ट सिटी अधिकारियों की दलील है कि जीआईआर सर्वे में केवल लोहे के पाइप का ही पता चलता है, लेकिन सीवर की लाइन डीआई पाइप की है। ऐसे में उसकी जानकारी तब मिली, जब खोदाई हुई।
अगर पाइप लाइन शिफ्ट की गई और शिफ्टिंग में टूट गई तो मुसीबत हो जाएगी। ऐसे ही पानी की जर्जर लाइन बदलने पर कम से कम एक सप्ताह तक जलापूर्ति बंद करनी होगी। इसकी जगह सड़क को ऊंचा करने का विकल्प है। अगर सड़क को दो फुट ऊंचा कर दिया जाए तो यह समस्या खत्म हो जाएगी।
समस्या : बगैर सर्वे के बिछा दी लाइन
जलनिगम के रिटायर्ड अभियंता आरके सिंह का कहना है कि इसमें पाइप लाइन बिछाने वाली कंपनी की भारी लापरवाही है। कोई भी लाइन बिछाने से पहले उसका सर्वे होता है कि कौन-कौन सी लाइनें भूमिगत हैं। अगर सीवर और पानी की लाइन के साथ नाला आ गया तो पाइप लाइन बिछानी नहीं चाहिए थी।
सुझाव : जहां नीचे पुरानी लाइन, वहां नहीं नहीं डालते
ट्रेंचलेस तकनीक से डालते हैं। जहां पहले से लाइन है, नई लाइन उसके साइड से निकाली जा सकती है। पुरानी लाइन वाला हिस्सा छोड़ दिया जाना चाहिए था। फिलहाल जो स्थिति है, उसमें भारी ट्रकों और वाहनों से पाइप को नुकसान पहुंच सकता है।
स्मार्ट सिटी के सीईओ निखिल टी फुंडे ने बताया कि जीवनी मंडी पर पाइप लाइन बिछाने के काम में यह शिकयत मिली कि पानी की लाइन सड़क से ऊपर है, जबकि यह मौजूदा सड़क तल से नीचे होनी चाहिए। पाइप लाइन नीचे कैसे हो या सड़क ऊंची बनाई जाए। इन सभी विकल्पों के लिए कमेटी बनाई है, जो अपनी रिपोर्ट देगी। उसके बाद कार्रवाई की जाएगी।