ताजनगरी में नींद की गोलियां नशे के लिए इस्तेमाल की जा रही हैं। मेडिकल स्टोर से इन्हें डॉक्टर के पर्चे के बगैर भी बेचा जा रहा है। विधि विज्ञान शाला में इनके सैंपल पहुंच रहे हैं। सात महीने में ही 48 सैंपल में नींद की गोलियां मिली हैं।
ये सैंपल पुलिस की ओर से भेजे गए। जनवरी से जुलाई तक 139 सैंपल गए। नारकोटिक्स अनुभाग में इनका परीक्षण किया। 40 में नींद की गोलियां मिलीं। ये सभी बगैर पर्चे के खरीदी गई थीं।
इसी कारण पुलिस ने इन सभी मामलों में केस दर्ज किया। एफएसएल का रिकार्ड बताता है कि अफीम, चरस से ज्यादा नींद की गोलियां नशे के लिए इस्तेमाल की जा रही हैं।
ताजगंज, जगदीशपुरा और न्यू आगरा में इसी साल ऐसे छह गिरोह पकड़े गए जिनके सदस्य नशे के लिए मोबाइल और चेन लूट करते हैं। न्यू आगरा के थाना प्रभारी ने बताया कि मोबाइल छीनने के तो 50 फीसदी मामले ऐसे हैं जिसे युवक स्मैक, चरस जैसे नशे के लिए करते हैं। सिलिंडर चोरी, कबाड़ चोरी की घटनाओं में भी नशा करने वाले लोग पकड़े जाते रहे हैं।
केस-1
सिकंदरा में दो महीने पहले आठ बच्चों ने हुक्का बार में जाने के लिए अपने ही घरों में चोरी की। ये नशा करने जाते थे। एक ने तो घर से 20 तोला सोना चोरी किया था।
केस- 2
हरीपर्वत में पिछले साल केस दर्ज किया। एक कोचिंग सेंटर में नशा कराया जा रहा था। नशे के लिए दो छात्र घर से 30 लाख का सामान चोरी कर ले गए थे। इस केस में ट्यूटर जेल गया था।
आगरा पुलिस से नशीले पदार्थ के हर महीने 15 से 20 सैंपल आ रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा नींद की गोलियां निकल रही हैं- डॉ. एके मित्तल, संयुक्त निदेशक, विधि विज्ञान प्रयोगशाला
नशे की तलब लगे तो समझो बीमारी है
मानसिक अरोग्यशाला एवं चिकित्सा संस्थान के सीएमएस डॉ. दिनेश राठौर कहते हैं कि नशा करने वाले व्यक्ति को अगर तलब उठने लगे। नशा न मिलने पर बेचैनी हो, नींद न आए, हाथ कंपकंपाएं तो समझ लेना चाहिए कि वह बीमार हो चुका है। उसे मनोचिकित्सक को दिखाया जाए।
साइकोथेरेपी से छूट सकता है नशा
1. अभिभावक अपने बच्चों के सामने उन लोगों को रोल मॉडल के रूप में पेश न करें जो नशा करते हैं।
2. अगर घर में कोई बड़ा नशा करता है तो बच्चों पर असर पड़ सकता है। बच्चे के दोस्त नशा करते हैं तो संभावना और ज्यादा है।
3. किसी शख्स ने पहली बार नशा किया हो तो उस पर गुस्सा के बजाय उसकी ठीक से काउंसलिंग की जाए ।
4. कोई शख्स नशे का आदी हो तो उसे साइकोथेरेपी के जरिए उसकी लत छुड़ाई जा सकती है।
5. कुछ लोग तनाव से बचने के लिए नशा शुरू करते हैं, वे नहीं जानते कि यह जाल है जिसमें फंसने जा रहे हैं।
हाल ही में तीन मेडिकल स्टोरों पर दवा बिक्री का ब्योरा नहीं मिला। इन्हें नोटिस देकर दवा बिक्री पर रोक लगाई गई है - एसएस सिंह, सहायक आयुक्त औषधि