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आगरा जमीन कांड: फर्जी वारिसान व मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने का मामला, वादी और केयरटेकर सहित छह गिरफ्तार, गए जेल

Wed, 10 Apr 2024 12:34 AM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

जगदीशपुरा जमीन प्रकरण में करोड़ों की जमीन पर कब्जे के लिए साजिश रची गई थी। इसके लिए तहसील और नगर निगम की टीम के समक्ष फर्जी गवाह पेश किए थे। 
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जेल। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के आगरा में बोदला के बहुचर्चित 10 हजार वर्ग मीटर जमीन कब्जाने के मामले में मंगलवार को नया मोड़ आ गया। एसआईटी की जांच में जमीन को कब्जाने के मुकदमे की वादी उमा देवी और पीड़ित केयरटेकर रवि कुशवाहा ही फर्जीवाड़ा करने के मुख्य आरोपी निकले। उन्होंने जमीन के असली मालिक टहल सिंह का मृत्यु और वारिसान प्रमाणपत्र तक फर्जी दस्तावेजों की मदद से बनवाए थे।

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खुद को टहल सिंह की पुत्रवधू बताने वाली उमा देवी फर्जी वारिस बनी थी। केयरटेकर और उसके भाई ने नगर निगम और तहसील की जांच में फर्जी गवाही देकर साथ दिया। टहल सिंह के पुलिस के सामने आने के बाद एसआईटी की जांच में यह खुलासा हुआ। इस पर मंगलवार को उमा देवी, रवि कुशवाहा सहित 6 को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। केस में विवेचना जारी है। जमीन कब्जाने के खेल के पीछे कौन है? इसकी जांच चल रही है।

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बोदला मार्ग पर बैनारा फैक्ट्री के पास 10 हजार वर्ग जमीन है। इस जमीन पर केयरटेकर के रूप में रवि कुशवाहा का परिवार रह रहा था। थाना जगदीशपुरा में 7 जनवरी को उमा देवी ने मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें कहा था कि बोदला मार्ग पर 10 हजार वर्गगज जमीन के मालिक टहल सिंह की पुत्रवधू है। टहल सिंह की मृत्यु हो चुकी है। उनके बेटे जसवीर की पत्नी है। जसवीर की मृत्यु के बाद वह अकेली वारिस है।

उमा देवी की तहरीर पर लिखा था मुकदमा, तीन गए थे जेल

उमा देवी की तहरीर में आरोप लगाया गया था कि जमीन पर कब्जे के लिए तत्कालीन एसओ जगदीशपुरा, बिल्डर कमल चौधरी और बेटे धीरू चौधरी सहित 12-15 अज्ञात ने साजिश की। रवि कुशवाहा, उसके भाई शंकरिया सहित परिवार के पांच सदस्यों को फर्जी मुकदमे दर्ज कर जेल भेजा गया। मामले में जमीन कब्जाने सहित अन्य धारा में मुकदमा लिखा गया। पुलिस ने तत्कालीन एसओ, पुरुषोत्तम पहलवान और अमित अग्रवाल को गिरफ्तार कर जेल भेजा। बिल्डर और उसके बेटे को हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर स्टे मिल गया था।
 

डीसीपी सिटी सूरज राय ने बताया कि प्रकरण की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया था। जमीन के असली मालिक के बारे में पड़ताल की गई। पता चला कि टहल सिंह पंजाब के लुधियाना स्थित समराला रोड पर रह रहे हैं। उन्हें बयान के लिए बुलाया गया। 20 मार्च को टहल सिंह पुलिस के सामने पेश हुए। उन्होंने बयान दिया कि उमा देवी को नहीं जानते हैं। जसवीर उनका बेटा नहीं साला है। उसकी मृत्यु हो चुकी है। उनके कोर्ट में बयान दर्ज कराए गए।
 

दस्तावेजों की जांच में सच आया सामने

इसके बाद नगर निगम से जारी टहल सिंह और जसवीर के मृत्यु प्रमाणपत्र, वारिसान प्रमाणपत्र की जांच की गई। पता चला कि प्रमाणपत्र बनवाने के लिए फर्जी आधार कार्ड, श्मशान घाट की रसीद सहित अन्य दस्तावेज का प्रयोग किया था। इसकी पुष्टि होने पर वादी उमा देवी, रवि कुशवाहा, शंकरिया, किशन मुरारी उर्फ मोहित कुशवाहा, धर्मेंद्र और राजू को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से जेल भेज दिए गए।
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जमीन कब्जाने के खेल के पीछे आखिर कौन

पुलिस ने करोड़ों की जमीन पर कब्जे के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करने के मामले में वादी सहित छह को जेल भेज दिया। लेकिन, जमीन को कब्जाने के खेल के पीछे आखिर और कौन लोग हैं? उनका खुलासा अब भी नहीं हो सका है। सिर्फ केयरटेकर और महिला के जमीन को कब्जाने की साजिश रचने पर सवाल उठ रहे हैं।
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