कासगंज। सिक्सलेन सड़क योजना में फिर से हरियाली पर गाज गिरेगी। फोरलेन सड़क के निर्माण के दौरान पहले ही 4 हजार बड़े पेड़ काटे जा चुके हैं। अब सिक्सलेन सड़क योजना में फिर बड़े पेड़ काटे जाएंगे। इसके लिए एनएचएआई और वन विभाग की टीम संयुक्त रूप से जांच करेगी। दो हजार से अधिक पेड़ों के कटने का अनुमान लगाया जा रहा है। पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य करने वाले कार्यकर्ता इसको लेकर चिंतित हैं।
स्टेट हाइवे 33 के राष्ट्रीय राजमार्ग 350 बी में परिवर्तित होने के बाद सिक्सलेन सड़क योजना को पूरा किया जाना है। मथुरा, हाथरस, कासगंज, बदायूं, बरेली की ओर यह सड़क निकलेगी। जिले की सीमा में दो खंडों में भूमि का अधिग्रहण होना है। करीब 120 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण के लिए चिह्नित की गई है। सिक्सलेन सड़क मार्ग में काफी बड़े और पुराने पेड़ हैं, जो जिले की आबोहवा के लिए काफी महत्वपूूर्ण हैं। चूंकि सड़क परियोजना में सड़क के चौड़ीकरण होने के कारण बड़े हरे पेड़ इस दायरे में होंगे, जिन्हें काटा जाएगा। अभी तक सर्वेक्षण में इन पेड़ों की संख्या कितनी होगी यह स्पष्ट नहीं हो सका है। पेड़ काटे जाने के लिए एनएचएआई और वन विभाग की संयुक्त टीम सर्वेक्षण करेगी। उसके बाद सही स्थिति सामने आएगी, लेकिन पेड़ों की संख्या 2000 हजार से अधिक होने का अनुमान लगाया जा रहा है। पर्यावरणविद मनोज शर्मा ने चिंता जताते हुए कहा है कि सड़क निर्माण में जो बड़े पेड़ काटे जाएंगे, उनका विकल्प आसानी से तैयार नहीं हो सकता, लेकिन अधिकारियों को इस बात की कोशिश करनी चाहिए कि एलाइनमेंट के माध्यम से जिन पेड़ों को बचाया जा सकता हो, उन्हें जरूर बचाया जाए। पर्यावरण का परियोजना में ध्यान रखा जाए। काटे जाने वाले पेड़ों की एवज में अन्य पेड़ लगाए जाएं।
- सिक्सलेन सड़क परियोजना में कितने पेड़ काटे जाएंगे यह अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन सड़क के दायरे में काफी पेड़ आएंगे। वन विभाग एनएचएआई के साथ इस संबंध में सर्वेक्षण करेगा। - हरीशंकर शुक्ला, डीएफओ