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आनंद इंजीनियरिंग कॉलेज की प्रयोगशाला में फंसा विशालकाय अजगर

Tue, 20 Oct 2020 03:12 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

आनंद इंजीनियरिंग कॉलेज के मैनेजमेंट और सफाई कर्मचारियों के लिए मंगलवार की सुबह काफी डरावनी रही, जब उन्होंने अचानक से
कॉलेज की एक प्रयोगशाला के दरवाजे के नीचे छह फुट लंबे अजगर को फंसा देखा। अजगर की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्होंने
तत्काल वाइल्डलाइफ एसओएस को सूचना दी।
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अजगर - फोटो : वाइल्डलाइफ एसओएस
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विस्तार
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आनंद इंजीनियरिंग कॉलेज के मैकेनिकल विभाग की मेट्रोलॉजी प्रयोगशाला के दरवाज़े के नीचे फंसे छह फुट लंबे अजगर को वाइल्डलाइफ एसओएस रैपिड रिस्पांस यूनिट ने मंगलवार को बचाया। अजगर को कुछ घंटों के लिए चिकित्सकीय निगरानी में रखने के बाद वापस अपने जंगल में छोड़ दिया गया।
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आनंद इंजीनियरिंग कॉलेज के मैनेजमेंट और सफाई कर्मचारियों के लिए मंगलवार की सुबह काफी डरावनी रही, जब उन्होंने अचानक से कॉलेज की एक प्रयोगशाला के दरवाजे के नीचे छह फुट लंबे अजगर को फंसा देखा। अजगर की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्होंने तत्काल वाइल्डलाइफ एसओएस को सूचना दी।


वन्यजीव संरक्षण संस्था की दो सदस्यीय रेस्क्यू टीम वहां पहुंची। सांप को सावधानीपूर्वक बाहर निकला और सुरक्षित रूप से कपड़े के बैग में स्थानांतरित कर दिया। वाइल्डलाइफ एसओएस को कॉल करने वाले, हॉस्टल मैनेजर, एके. सिंह ने बताया, अजगर प्रयोगशाला के अंदर जाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन जगह कम होने के कारण वह फंस गया। 
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एक अन्य घटना में अछनेरा के झारोटी गांव से लगभग दस फुट लंबे अजगर को भी वाइल्डलाइफ एसओएस टीम ने बचाया। विशालकाय अजगर एक खुले बोरवेल में गिर गया था। अजगर को सुरक्षित रूप से बाहर निकालने में टीम को लगभग एक घंटे का समय लगा। बाद में अजगर को वापस जंगल में छोड़ दिया गया।


वाइल्डलाइफ एसओएस के डायरेक्टर कंज़रवेशन प्रोजेक्ट्स, बैजराज एमवी. ने कहा, सर्दियों के नजदीक आने के साथ ही अजगर अपने शरीर के तापमान को बनाए रखने के लिए जंगल से बाहर निकलेंगे। लोगों से अनुरोध करते हैं कि वे ऐसी किसी भी स्थिति में घबराएं नहीं और हमारे हेल्पलाइन नंबर पर घटना की सूचना दें। 


वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने कहा, अजगर अक्सर अपने आकार के कारण गलतफहमी के शिकार हो जाते है, और लोग इन्हें खतरनाक मान लेते हैं। इस प्रजाति को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची, के तहत एक बाघ के समान ही सुरक्षा की सूची में रखा गया है। 
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