निजी अस्पतालों की जरा सी लापरवाही ने दो परिवारों की खुशियों को छीन लिया। यहां चढ़ाए गए संक्रमित खून के कारण एक पूरा परिवार तथा दूसरे परिवार में पति और पत्नी एचआईवी की चपेट में आ गए हैं। जनवरी महीने में जिले में छह लोग एचआईवी पॉजिटिव पाए गए हैं।
शहर निवासी एक पूरा परिवार एचआईवी की चपेट में आ गया है। जांच के बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से की गई काउंसलिंग में निजी अस्पताल को जिम्मेदार ठहराया गया है। युवक के अनुसार वह मजदूरी करता है।
दो वर्ष पहले वह फर्रुखाबाद में रहकर मजदूरी कर रहा था। तभी पत्नी की तबियत खराब हो गई। खून की कमी होने पर एक निजी अस्पताल में ब्लड चढ़वाया था। जनवरी में युवक की हालत बिगड़ी तो वह इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचा।
जांच में वह एचआईवी पॉजिटिव पाया गया। डॉक्टरों की सलाह पर पत्नी और छह महीने के बच्चे की जांच हुई तो वह भी एचआईवी पॉजिटिव पाए हैं। युवक का आरोप है कि संक्रमित खून से पत्नी उसे और बच्चे को एचआईवी हुआ है।
वहीं शहर निवासी एक अन्य दंपती भी एचआईवी पॉजिटिव पाया गया है। काउंसलिंग में पीड़ित पति ने बताया कि वह एक वर्ष पहले बीमार हुआ था तो शहर के एक अस्पताल में खून चढ़ाया गया था।
जनवरी महीने में उसकी तबियत खराब होने पर उसे एचआईवी पॉजिटिव बताया गया है। पत्नी भी जांच में एचआईवी पॉजिटिव पाई गई है। इसके अलावा एक अन्य युवक भी एचआईवी पॉजिटिव पाया गया है। यह युवक पेशे से ड्राइवर है।
इलाज के लिए सैफई भेजा गया
जिला अस्पताल में हुई जांच में जनवरी में जिले में छह लोग एचआईवी पॉजिटिव पाए गए हैं। सभी को उच्च स्तरीय जांच और इलाज के लिए सैफई रेफर किया गया है। एक साथ पूरे परिवार और दंपती को एचआईवी होने से पूरा परिवार दहशत में है।
जनवरी में जिले में कुल छह लोग एचआईवी पॉजिटिव पाए गए हैं। इनमें एक ही परिवार के तीन सदस्य और दंपती के अलावा एक ड्राइवर शामिल है। दो परिवारों के सदस्यों को एचआईवी एड्स होने का कारण संक्रमित रक्त बताया गया है। उच्चाधिकारियों को भी रिपोर्ट भेज दी गई है। लोगों से भी अपील है कि वह खून पंजीकृत ब्लड बैंक से लें। मैनपुरी में जिला अस्पताल के अतिरिक्त कोई पंजीकृत ब्लड बैंक नहीं है। ऐसे में जिला अस्पताल से ही खून चढ़वाएं।
-नरसिंह राठौर, प्रभारी एड्स जांच केंद्र