फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एसआईटी को फिर दिखाया ठेंगा

Wed, 13 Jan 2016 01:14 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
विज्ञापन
विज्ञापन
डा. बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय के चर्चित फर्जी मार्कशीट प्रकरण की जांच कर रही एसआईटी को कर्मचारियों ने एक बार फिर ठेंगा दिखा दिया। विशेष जांच दल की दो सदस्यीय टीम ने बीएड के गोपनीय चार्ट मांगे थे। कर्मचारियों ने इन्हें देने से इंकार कर दिया। इस पर आठ कर्मचारियों के खिलाफ नोटिस जारी कर दिए गए हैं।
विज्ञापन

इससे पहले 12 कर्मचारियों को नोटिस मिल चुके हैं, लेकिन किसी पर कोई असर नहीं पड़ रहा। एसआईटी पिछले महीने 2006 से 2013 तक  बीएड और गोपनीय विभाग में तैनात रहे कर्मचारियों का रिकार्ड लेने आई थी। तब भी बैरंग लौटना पड़ा था। यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने इन कर्मचारियों पर कोई एक्शन नहीं लिया है।
यूनिवर्सिटी के सूत्रों ने बताया कि मंगलवार को एसआईटी कुलसचिव कार्यालय के मीटिंग रूम में पहुंची। वहां कर्मचारियों से दो घंटे पूछताछ की। इसके बाद उनसे रिकार्ड मांगा, लेकिन उन्होंने नहीं दिया।
विज्ञापन

इनको भी नहीं मिली मार्कशीट
2008 बैच सप्लीमेंट्री, 2011 और 2012 बैच के सेकेंड प्रोफेशनल के 300 छात्रों को मार्कशीट नहीं मिली है। विश्वविद्यालय में इनके चार्ट होने की बात तो स्वीकारी जा रही है, लेकिन मार्कशीट क्यों रुकी है? इसका जवाब नहीं।
छात्रों को दिए जा रहे पर्सनल फोन नंबर
मार्कशीट, डिग्री की शिकायत लेकर आने वाले मेडिकल छात्रों को झांसे में रखा जा रहा है। विश्वविद्यालय में उनके प्रार्थना पत्र रिसीव न कर उनको पर्सनल फोन नंबर दिए जा रहे हैं। एसएन मेडिकल कालेज से 2014 में एमबीबीएस कर चुके डा. संदीप कुमार चार्ट न होने के कारण मिनी प्रोफेशनल की मार्कशीट न मिलने की शिकायत लेकर एक अधिकारी से मिलने पहुंचे तो उन्हें फोन नंबर देकर कुछ दिन बाद बुलाया।
दो साल में सिर्फ छापे ही मारे
डा. बीआर अंबेडकर यूनिवर्सिटी के फर्जी मार्कशीट प्रकरण की जांच कर रही एसआईटी की बातें तो बड़ी-बड़ी हैं लेकिन कार्रवाई के नाम पर कॉलम पूरा का पूरा खाली है। दो सालों में एक भी घोटालेबाज की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। एफआईआर भी सिर्फ एक ही दर्ज की गई है। इसके नामजद आरोपियों को पकड़ने का प्रयास तक नहीं किया गया है। महीने में एसआईटी एक बार छापा मारने आ जाती है।
इसके बाद कोई एक्शन नहीं होता। छापे के लिए दरोगा और इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी भेजे जाते हैं, जबकि जांच डीजी एसआईटी के नेतृत्व में चल रही है। इससे पहले पुलिस की जांच भी इसी तरह से चली थी। खुलासे चौंकाने वाले थे, लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ था। पांच एफआईआर दर्ज की गई थी। बाद में सभी में फाइनल रिपोर्ट लगाकर फाइल बंद कर दी गई।
इसके बाद जांच एसआईटी को मिली तो लगा कि कुछ होगा। लेकिन अभी तक की जांच किसी दिशा में जाती नजर नहीं आ रही। दो सालों से जांच चल रही है। घोटाला रुका नहीं है। बीएड के 2014-15 के सत्र में भी सात हजार फर्जी परीक्षार्थी परीक्षा में बैठे। इसमें 25 हजार फर्जी मार्कशीट जारी की गई हैं।
इनसे 4,500 शिक्षक भर्ती हुए हैं। इनकी सूची तैयार है। नकेस दर्ज किया है और न ही बेसिक शिक्षा विभाग ने इन्हें बर्खास्त किया है। अभी तक एसआईटी ने सिर्फ एक केस दर्ज किया है। इसमें 2005 में तैनात रहे रजिस्ट्रार, सब रजिस्ट्रार समेत पांच आरोपी बनाए गए। केस के बाद इन पर कोई एक्शन नहीं हुआ है। घोटाला करोड़ों का बताया जा रहा है लेकिन रिकवरी एक रुपये की भी नहीं की गई है।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें