डा. बीआर अंबेडकर यूनिवर्सिटी के फर्जी मार्कशीट प्रकरण की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम(एसआइटी) को दो दिन चले सर्च आपरेशन में अहम सुबूत हाथ लग गए हैं। रिकार्ड से पता चला है कि बीएड के 2004 सत्र के 84 कालेजों में आठ हजार से अधिक फर्जी छात्रों ने परीक्षा दी। इसकी पुष्टि कालेजों की फॉइल सीट से हुई है। इसमें कालेजों ने तय सीट से डेढ़ से दो गुने छात्रों को बीएड करा दी गई है।
एसआईटी की सर्च टीम ने रविवार की रात गोपनीय विभाग के सीनेट हाउस में सर्च अभियान चलाया था। सोमवार को भी यह जारी रहा। इसमें कुछ अलमारी के ताले तोड़कर फॉइल प्राप्त की। इसमें 2004 सत्र के दो पेपर की फॉइल ही मिली थी। इनको जब्त करते हुए टीम ने जांच शुरू कर दी।
सोमवार को टीम ने इससे जुड़े अन्य पेपरों की फॉइल और चार्ट भी मंगवाए। इसमें 84 कालेजों का पूरा विवरण दर्ज है। इसमें तय सीट, बांटी गई मार्कशीट और अधिकारियों के हस्ताक्षर भी हैं। सूत्रों ने बताया कि टीम को जांच में पता चला कि किसी की 50, तो किसी को 100 सीट हैं। जबकि बांटी गई मार्कशीट के आगे 150, 200 तक दर्ज हैं। इन सभी का कंप्यूटर में डाटा फीड किया जा रहा है।
परीक्षा में शामिल छात्रों को नहीं आएगी आंच
सूत्र बताते हैं कि एसआईटी ऐसे अभ्यर्थियों की जांच कर रही है, जिन्होंने परीक्षा नहीं दी है। इसके लिए बीएड परीक्षा विभाग से संबंधित सत्र के सभी पेपरों की उपस्थिति का रिकार्ड मंगवाया है।
संबद्धता नहीं, फिर भी करा दी बीएड
एसआईटी को जांच में 84 में से सात कालेज ऐसे मिले हैं, जिनकी विश्वविद्यालय से संबद्धता ही नहीं थी, फिर भी प्रति कालेज 150-200 छात्रों को बीएड करा दी। मतलब, इन कालेजों को विश्वविद्यालय से बीएड की संबद्धता 2006 में मिली और 2004 में इन्होंने मार्कशीट बांट दी। इसमें दो-दो कालेज अलीगढ़, फीरोजाबाद और तीन कालेज आगरा के हैं।
अब एक-एक सत्र की होगी जांच
फर्जीवाड़े के मकड़जाल से निपटने के लिए एसआईटी अब एक-एक सत्र की जांच करेगी। शुरूआत 2004 सत्र से हो चुकी है। इसकी फाइनल रिपोर्ट बनाने के बाद ही आगे के सत्रों की जांच की बारी आएगी। टीम के निशाने पर 2009 तक के सत्र हैं।