एनएचएआई ने 2012 में सब्जी मंडी से सिकंदरा चौराहा से आगे तक पहली बार 45 करोड़ रुपये की लागत से फ्लाईओवर के लिए डिजाइन बनाई थी। सिकंदरा स्मारक को देखते हुए एएसआई ने इसकी डिजाइन में बदलाव करने के लिए कहा है। नए सिरे से बनी डिजाइन पर भी एएसआई को आपत्ति थी। ऐसे में बीते 2024 में एक बार फिर डिजाइन बनी लेकिन मेट्रो के एलिवेटेड ट्रैक के चलते ये डिजाइन रद्द करनी पड़ी। ऐसे में शासन ने एएसआई, एनएचएआई और उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल काॅरपोरेशन की संयुक्त टीम को सर्वे कर अंतिम डिजाइन बनाने के आदेश दिए।
इसमें बीती जनवरी माह में ड्रोन सर्वे किया, जिसमें फ्लाईओवर की ऊंचाई 5-6 मीटर की योजना बनाई गई। जुलाई-अगस्त में फिर से ड्रोन सर्वे कर अन्य संभावनाएं देखी जाएंगी। अंतिम डिजाइन बनने पर इसकी लागत पहले के मुकाबले डेढ़ से दोगुना हो सकती है। इससे पहले एनएचएआई जरूरी विभागों से एनओसी लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसमें एएसआई, टीटीजेड, एडीए, नगर निगम, जलकल विभाग और वन विभाग से एनओसी की प्रक्रिया शुरू कर दी है। डिजाइन और डीपीआर बनने तक एनओसी मिलने से निर्माण कार्य तेज हो सकेगा।
एनएचएआई के घटना प्रबंधक दीपक खटाना ने बताया कि संयुक्त टीम चरणबद्ध सर्वे कर डिजाइन बना रही है। जुलाई-अगस्त में फिर से ड्रोन सर्वे होगा। इसमें फ्लाईओवर के लिए कितनी जगह चाहिए, बनने के बाद कितनी जगह बचेगी। सर्विस रोड और एप्रोच रोड की क्या स्थिति रहेगी। स्मारक की जद से कैसे बचाया जाए, ऐसे तमाम बिंदुओं पर रिपोर्ट बन रही है। इससे पहले जरूरी विभागों से एनओसी के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है।