हत्या के मामले में दोषी पाए जाने पर बाबूराम को आजीवन कारावास की सजा हो चुकी है। करीब तीन माह पूर्व ही जिला जेल आए हैं। सोमवार को तबियत खराब होने पर अस्पताल में भर्ती कराया था। उच्चाधिकारियों के आदेश पर बंदी रक्षक को निलंबित कर दिया गया है। विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।
- राजीव कुमार शुक्ल, जेल अधीक्षक
बाबूराम पर आरोप है कि 1982 में एक व्यक्ति का अपहरण के बाद हत्या कर दी थी। इस मामले में 1997 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। इसके बाद अपील पर पैरोल मिल गया। 2020 में अपील खारिज कर दी गई और हाजिर नहीं होने पर कुर्की के आदेश हो गए। करीब तीन माह पहले बाबूराम ने खुद को हाजिर कर दिया, तभी से जेल में हैं। बाबूराम पहले प्रधान भी रह चुके हैं।
कैदी का तीन दिन से इलाज चल रहा था। जांच में कोरोना तो नहीं आया, लेकिन लक्षणों के आधार पर भर्ती कर ऑक्सीजन दी जा रही थी। बृहस्पतिवार को उसकी हालत ज्यादा बिगड़ने पर उच्च चिकित्सा के लिए रेफर कर दिया गया है।
- डॉ. अशोक कुमार, सीएमएस जिला महिला अस्पताल
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