दीवानी परिसर में सांकेतिक प्रदर्शन
पुलिस के आख्या नहीं देने से अधिवक्ताओं में आक्रोश है। उनका कहना था कि पुलिस ने जानबूझकर ऐसा किया है। इससे डाक्टर के खिलाफ कार्रवाई में देरी हो रही है। इस संबंध में एसएसपी से मुलाकात की जाएगी। जल्द रिपोर्ट दिलाने के लिए कहा जाएगा।
यह अधिवक्ता रहे मौजूद
इस दौरान अधिवक्ता नितिन वर्मा, डा. जेके पाठक, सुनील शर्मा, योगेश लवानिया, हेमेंद्र पाठक, उमेश वर्मा, मंजू द्विवेदी, कृष्ण मुरारी माहेश्वरी, पंकज सिंह, सुशील अग्रवाल, गगन शर्मा, श्रेष्ठा मिश्रा, अजय चाहर, शानू मोहम्मद, देवेंद्र सिंह, सूरजभान भारतीय, सिद्धार्थ गौतम, गौतम देव शर्मा, राहुल वर्मा, सुमित पालीवाल, अरुण तेहरिया, राजीव ठाकुर, आदि मौजूद रहे।
जांच के बाद कोर्ट में आख्या दी जाती है। इस मामले में भी जांच की जा रही है। - मुनिराज जी, एसएसपी
पुलिस की ओर से रिपोर्ट न भेजना न्यायिक कार्रवाई की अवहेलना करना है। पुलिस प्रशासन का रवैया सही नहीं है। पीड़ितों को न्याय के लिए भटकना पड़ रहा है। - डा. हमेंद्र पाठक, कमिश्नरी कोर्ट बार एसोसिएशन
मामला अधिक गंभीर प्रकृति का है। कोर्ट ने तारीख लगाई थी। एक सप्ताह में भी पुलिस ने रिपोर्ट नहीं लगाई। यह पुलिस की लापरवाही है। - डा. जेके पाठक, पूर्व चेयरमैन, बार कौंसिल उत्तर प्रदेश
श्री पारस मामले में पुलिस प्रशासन का रवैया पहले से ही ठीक नहीं रहा है। अधिवक्ता इस व्यवहार को बर्दाश्त नहीं करेंगे। इस मामले में एसएसपी से शिकायत की जाएगी। - योगेश लवानिया, वरिष्ठ अधिवक्ता
पूर्व में अस्पताल को क्लीन चिट दी जा चुकी है। इस प्रकरण को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। दंड प्रकिया संहिता की धारा 154 कहती है कि प्रत्येक व्यक्ति की शिकायत लिखित अथवा मौखिक थाना अधिकारी के रजिस्टर में दर्ज की जा सकेगी। पुलिस की ओर से रिपोर्ट नहीं भेजना सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन भी है। - नितिन वर्मा, मंडल अध्यक्ष, युवा अधिवक्ता संघ
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