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श्री पारस अस्पताल प्रकरण: अदालत में पुलिस ने नहीं भेजी आख्या, नौ अगस्त की तारीख लगी

Sat, 17 Jul 2021 12:11 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

शुक्रवार को कोर्ट में प्रार्थना पत्र पर सुनवाई हुई। मगर, पुलिस की ओर से आख्या प्रस्तुत नहीं करने की वजह से कोर्ट ने अब नौ अगस्त की तारीख सुनवाई के लिए दी है।
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श्री पारस अस्पताल आगरा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आगरा के श्री पारस अस्पताल के मालिक और अन्य पर मुकदमा दर्ज कराने के लिए छत्ता निवासी अशोक चावला ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था। शुक्रवार को कोर्ट में प्रार्थना पत्र पर सुनवाई हुई। मगर, पुलिस की ओर से आख्या प्रस्तुत नहीं करने की वजह से कोर्ट ने अब नौ अगस्त की तारीख सुनवाई के लिए दी है। थाना पुलिस को आख्या प्रस्तुत करने के आदेश दिए है। इस दौरान अधिवक्ताओं का पैनल मौजूद रहा।

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युवा अधिवक्ता संघ के मंडल अध्यक्ष नितिन वर्मा ने बताया कि छत्ता निवासी अशोक चावला ने मुकदमा दर्ज कराने के लिए कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था। उनके पिता की 26 अप्रैल और भाई की पत्नी की 27 अप्रैल को श्री पारस अस्पताल में मृत्यु हुई थी। दोनों को कोरोना संक्रमित होने पर भर्ती कराया गया था। पुलिस के सुनवाई नहीं करने पर अशोक चावला ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

शुक्रवार को प्रार्थना पत्र पर सुनवाई हुई। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट में अधिवक्ताओं का पैनल उपस्थित हुआ। मगर, कोर्ट में पुलिस की ओर से आख्या नहीं भेजी गई थी। इस पर अधिवक्ताओं ने नाराजगी जताई। अधिवक्ताओं ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट से कहा कि प्रकरण गंभीर प्रकृति का है। पुलिस ने जांच रिपोर्ट को कोर्ट में प्रस्तुत नहीं किया है। कोर्ट ने थाना प्रभारी निरीक्षक को पुन: रिपोर्ट के लिखा है। अधिवक्ताओं ने पीड़ित राजू यादव के मामले में भी कोर्ट में नौ अगस्त की तारीख लगे होने के बारे में जानकारी दी। इस पर कोर्ट ने दोनों पत्रावली पर नौ अगस्त की तारीख लगाई है। पुलिस को भी आख्या देने के लिए कहा है।

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पुलिस के आख्या नहीं देने से अधिवक्ताओं में आक्रोश है। उनका कहना था कि पुलिस ने जानबूझकर ऐसा किया है। इससे डाक्टर के खिलाफ कार्रवाई में देरी हो रही है। इस संबंध में एसएसपी से मुलाकात की जाएगी। जल्द रिपोर्ट दिलाने के लिए कहा जाएगा।

यह अधिवक्ता रहे मौजूद
इस दौरान अधिवक्ता नितिन वर्मा, डा. जेके पाठक, सुनील शर्मा, योगेश लवानिया, हेमेंद्र पाठक, उमेश वर्मा, मंजू द्विवेदी, कृष्ण मुरारी माहेश्वरी, पंकज सिंह, सुशील अग्रवाल, गगन शर्मा, श्रेष्ठा मिश्रा, अजय चाहर, शानू मोहम्मद, देवेंद्र सिंह, सूरजभान भारतीय, सिद्धार्थ गौतम, गौतम देव शर्मा, राहुल वर्मा, सुमित पालीवाल, अरुण तेहरिया, राजीव ठाकुर,  आदि मौजूद रहे।

जांच के बाद कोर्ट में आख्या दी जाती है। इस मामले में भी जांच की जा रही है। - मुनिराज जी, एसएसपी
 
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पुलिस की ओर से रिपोर्ट न भेजना न्यायिक कार्रवाई की अवहेलना करना है। पुलिस प्रशासन का रवैया सही नहीं है। पीड़ितों को न्याय के लिए भटकना पड़ रहा है। - डा. हमेंद्र पाठक, कमिश्नरी कोर्ट बार एसोसिएशन

मामला अधिक गंभीर प्रकृति का है। कोर्ट ने तारीख लगाई थी। एक सप्ताह में भी पुलिस ने रिपोर्ट नहीं लगाई। यह पुलिस की लापरवाही है। - डा. जेके पाठक, पूर्व चेयरमैन, बार कौंसिल उत्तर प्रदेश

श्री पारस मामले में पुलिस प्रशासन का रवैया पहले से ही ठीक नहीं रहा है। अधिवक्ता इस व्यवहार को बर्दाश्त नहीं करेंगे। इस मामले में एसएसपी से शिकायत की जाएगी। - योगेश लवानिया, वरिष्ठ अधिवक्ता

पूर्व में अस्पताल को क्लीन चिट दी जा चुकी है। इस प्रकरण को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। दंड प्रकिया संहिता की धारा 154 कहती है कि प्रत्येक व्यक्ति की शिकायत लिखित अथवा मौखिक थाना अधिकारी के रजिस्टर में दर्ज की जा सकेगी। पुलिस की ओर से रिपोर्ट नहीं भेजना सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन भी है। - नितिन वर्मा, मंडल अध्यक्ष, युवा अधिवक्ता संघ

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