श्री पारस अस्पताल प्रकरण में अधिवक्ताओं ने रखे अपने विचार
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प्रशासन ने जांच नहीं की, साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया
मॉकड्रिल के जिस तरह से वीडियो आए हैं। मेरा अपना मानना है ये सीधा हत्या का केस बनता है। मॉकड्रिल हुई, लेकिन उसका कोई कारण समझ नहीं आता है। प्रशासन ने जिस तरह से जांच की है उससे लगता है उन्होंने साक्ष्यों को नष्ट करने और दबाने का प्रयास किया। ताकि मौतों की सच्चाई सामने नहीं आ सके। मौतें चार से 16 हो गई। 22 के आरोप हैं। प्रशासन की भी इस मामले में लिप्तता है। इस कांड की सीबीआई जांच हो। प्रशासनिक पहलू की भी जांच होनी चाहिए। मॉकड्रिल जीवन की कीमत पर नहीं कर सकते। तीन मिनट किसी की ऑक्सीजन बंद कर दी, तो वह मर जाएगा। अगर पांच मिनट मॉकड्रिल करें तो आप जानते हैं जो मरीज ऑक्सीजन पर हैं उनकी मृत्यु हो जाएगी। यह जानबूझकर किया कृत्य है। - हरी दत्त शर्मा, वरिष्ठ अधिवक्ता, फौजदारी
रिटायर्ड जज से कराई जा सकती है जांच
इस मामले में सभी पहलुओं से जांच होनी चाहिए। संचालक, प्रशासन और पीड़ित तीनों पक्षकार हैं। किन बिंदुओं पर जांच की गई है जब तक वह रिपोर्ट नहीं देख लेते कुछ भी कहना सही नहीं है। पिछली बार अस्पताल बंद हुआ था तो खुल कैसे गया ये बड़ा सवाल है। दबाव मुक्त जांच होनी चाहिए। कोई रिटायर्ड जज से जांच कराई जा सकती है। जज गैर राज्य का भी हो सकता है। - प्रो. अरिवंद मिश्रा, राज्यपाल के पूर्व विधि सलाहकार
आगरा के अधिवक्ताओं ने की पारस अस्पताल की जांच कराने की मांग
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जांच सही नहीं, वरना क्यों उठती अंगुलियां
प्रशासन की जांच सही नहीं लगती। वरना अंगुलियां क्यों उठतीं। न्यायिक पहलू से देखें तो ये मामला बहुत गंभीर है। इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। सभी को मालूम है उस समय ऑक्सीजन की भारी कमी थी। सरकार ने झूठा बोला, प्रशासन भी झूठ बोल रहा है। इससे जनता में क्या संदेश जाएगा। इस मामले का हाईकोर्ट को स्वत: संज्ञान लेना चाहिए। जनहित से जुड़ा सीधा मामला है। ताकि भविष्य के लिए एक नजीर बन सके। मरीजों से खिलवाड़ का अधिकार नहीं है। - धर्मेंद्र वर्मा, अधिवक्ता
आईएमए और संचालक ने किया जांच को प्रभावित
जांच के नाम पर वही हुआ जो जनता सोच रही थी। इसमें आईएमए और अस्पताल संचालक ने जांच को प्रभावित किया है। जिला प्रशासन द्वारा गलत जांच रिपोर्ट दी गई है। श्री पारस ही नहीं, अन्य अस्पतालों ने भी कोविड में मरीजों से ज्यादा बिल की वसूली की। आईएमए मनमानी पर पर्दा डालता रहा है। मरीजों के परिजन चीखते रहे, लेकिन प्रशासन चुप बना रहा। पीड़ितों के साथ न्याय के लिए पूरे प्रकरण की दोबारा निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। - दिनेश शर्मा, महासचिव, एडवोकेट वेलफेयर एसोसिएशन
संचालक को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाए
यह बेहद संवेदनशील मामला है। अस्पताल संचालक मरीजों की मौत का जिम्मेदार है। उसके खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज होना चाहिए। गिरफ्तार कर पुलिस को उसे जेल भेजना चाहिए। प्रशासन भी इस पूरे मामले में जांच के घेरे में है। इस कांड के बाद जनता में अस्पतालों में जाने से भय व्याप्त है। सरकार को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए, तभी जनता को न्याय मिलेगा। - रामप्रकाश शर्मा, सचिव, आगरा बार एसोसिएशन
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