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श्रीकृष्ण जन्मस्थान-ईदगाह प्रकरण: सिविल जज की अदालत में रंजना अग्निहोत्री के केस की सुनवाई 1 जुलाई को, जानें पहले दिन क्या रहा

Fri, 27 May 2022 02:55 AM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा

सार

सबसे पहले सितंबर 2020 को अदालत में वाद पेश करने वाली सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री के श्रीकृष्ण जन्मस्थान ईदगाह प्रकरण से संबंधित पहली सुनवाई बुधवार को शुरू हुई। 
 
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जिला एवं सत्र न्यायालय मथुरा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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श्रीकृष्ण जन्मस्थान-ईदगाह प्रकरण में दो साल की लंबी सुनवाई के बाद दर्ज हुए सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री के केस की पहली तारीख पर सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत ने केस की प्रति प्रतिवादियों को सौंपने के निर्देश दिए। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए एक जुलाई की तारीख तय की है।

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सबसे पहले सितंबर 2020 को अदालत में वाद पेश करने वाली सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री के श्रीकृष्ण जन्मस्थान ईदगाह प्रकरण से संबंधित पहली सुनवाई बुधवार को शुरू हुई। पहले दिन अदालत ने वाद की पेरोकारी कर रहे पक्षकार के अधिवक्ता गोपाल खंडेलवाल को प्रतिवादीगणों को वाद की प्रति देने के लिए कहा। इससे पूर्व अधिवक्ता ने एडीजे सप्तम की अदालत द्वारा वाद दर्ज करने संबंधी आदेश की जानकारी दी। 

प्रतिवादीगण तथा उनके अधिवक्तागण भी रहे मौजूद

अदालत में इस दौरान प्रतिवादीगण तथा उनके अधिवक्तागण भी मौजूद रहे। वादी रंजना अग्निहोत्री ने बताया कि हम सभी प्रतिवादीगण को वाद की प्रति सौंप देंगे। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए एक जुलाई की तारीख तय की है। अदालत में मौजूद शाही ईदगाह के सचिव एडवोकेट तनवीर अहमद ने बताया कि अभी इस केस से संबंधित वाद की प्रति उन्हें नहीं मिली है। वाद की प्रति मिलने पर वह अदालत को जवाब सौंपेंगे।

विवाद बताकर कर रहे गुमराह : तनवीर

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के अधिवक्ता शैलेंद्र सिंह ने एडीजे सप्तम की अदालत में हाईकोर्ट का जो आदेश सौंपा है। उसका ईदगाह-श्रीकृष्ण जन्मस्थान संस्थान के साथ हुए समझौते से कोई लेना-देना नहीं है। यह जानकारी शाही ईदगाह के सचिव एडवोकेट तनवीर अहमद ने दी। बताया कि यह आदेश हाईकोर्ट द्वारा अलग परिप्रेक्ष्य में दिया गया है। इसे ईदगाह-संस्थान समझौते से संबंधित बताकर गुमराह किया जा रहा है। अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष द्वारा हास्यापद प्रार्थनापत्र लगाए जा रहे हैं, उनका कोई औचित्य नहीं है।

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