होटल मुगल में सोमवार से शुरू हुए प्रदेश के पहले यूपी प्रवासी दिवस सम्मेलन में शिरकत करने आए एनआरआई के मन में अपनी माटी के लिए बहुत कुछ करने का जज्बा है। लेकिन उनकी शर्तें भी हैैं। उन्होंने प्रदेश सरकार की इस पहल को शानदार बताया। वे यूपी में निवेश के लिए तैयार हैं, लेकिन इसके लिए अखिलेश को निवेश का माहौल बनाना होगा। प्रदेश में दो काम बहुत जरूरी हैं। एक तो लॉ एंड आर्डर, दूसरा सरकारी मशीनरी। यदि ये दोनों सुधर जाएं तो यहां फ्रेंडली माहौल बन सकता है। अमर उजाला से बातचीत में सामने आई एनआरआई के मन की बात...
मूलरूप से लखनऊ निवासी रविंद्र शर्मा की दुबई में माइनिंग कंसल्टिंग कंपनी है। उन्होंने बताया कि दुबई में अगर कोई फैक्ट्री लगाना चाहे तो सारी औपचारिकताएं तीन दिन में पूरी हो जाती हैं। यूपी में पांच से छह महीने लगते हैं। वो भी तब जब तक दफ्तरों के चक्कर काटे जाएं। यह अंतर खत्म करना होगा।
मूलरूप से लखनऊ के ही जमाल अख्तर की दुबई में केमिकल फैक्ट्री है। कहते हैं कि सीएम की पहल तो सराहनी है, लेकिन सिस्टम पारदर्शी होना चाहिए। दूसरा यहां टैक्स भी ज्यादा हैं। निवेशकों के लिए सुविधाएं कुछ भी नहीं हैं। एनओसी के लिए सिंगल विंडो सिस्टम होना चाहिए। तभी माहौल बन सकेगा।
अलीगढ़ की सुबोई खान सऊदी अरब में नदीम तरीम एजुकेशनल सोसाइटी की संयोजक हैं। कहती हैं कि नदीम साहब (परिवारीजन) ने अलीगढ़ में यूनिवर्सिटी तैयार की है लेकिन इसकी फाइल लखनऊ में लटकी है। सरकारी मदद के बिना कैसे निवेश आएगा? हम यहां अल्पसंख्यक , पिछड़े लोगों में शिक्षा का स्तर सुधारना चाहते हैं।
मथुरा के घड़ी गोहनपुर गांव के धर्मसिंह राजपूत की दुबई में साउथ एशिया नाम से कंपनी है। कहते हैं कि जब गुजरात को एनआरआई सम्मेलन का लाभ मिला है, तो यूपी को क्यों नहीं मिलेगा? बस सीएम को माहौल सुधारना होगा। यहां के एनआरआई भी अपनी माटी के लिए कुछ करना चाहते हैं।
अमेरिका में वाशिंगटन के पास बल्टीमोर शहर में हर्ट्ज कंपनी में काम करने वाले रमेश यादव देवरिया के रहने वाले हैं। कहते हैं यूपी में कानून व्यवस्था सुधर जाए तो राज्य की छवि चमक सकती है। तभी निवेश आ सकता है। एनआरआई के मन में कुछ सवाल हैं लेकिन सम्मेलन में जवाब देने के लिए अधिकारी तैनात नहीं है।
अमेरिका के न्यू जर्सी में आईटी फर्म अर्कजन के प्रेसिडेंट आशीष सिंह लखनऊ के हैं। उनका कहना है कि सिर्फ सम्मेलन करने से निवेश नहीं आएगा, सरकार को बताना होगा कि निवेश करने वालों को क्या सहूलियत मिलेंगी? अमेरिका में कोई निवेश करना चाहता है तो वहां सरकार बताती है कि कच्चा माल कहां से मिलेगा? कहां फैक्ट्री लगानी चाहिए? खरीदार (मार्केट) कहां-कहां हैं?