आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में वेंटिलेटर की कमी है। यहां नवजात सघन चिकित्सा कक्ष (एनआईसीयू) में 16 बेड के लिए चार ही वेंटिलेटर लगे हुए हैं, जबकि सभी बेड पर वेंटिलेटर जरूरी हैं। प्री मैच्योर डिलीवरी के मामलों के अलावा निमोनिया से पीड़ित बच्चों के इलाज के दौरान इनकी अधिक जरूरत होती है।
एनआईसीयू में 12 वेंटिलेटर की कमी होने के कारण गंभीर हाल के नवजात के इलाज में परेशानी हो रही है। तापमान कम होने पर निमोनिया से पीड़ित नवजातों की संख्या डेढ़ गुना बढ़ गई है। रोजाना दो से तीन नवजात को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ती है। वेंटिलेटर खाली होने तक इनको ऑक्सीजन पर रखा जाता है। कई तीमारदार नवजात को निजी अस्पताल में भर्ती कराने ले जाते हैं।
केस: 1
आवास विकास कॉलोनी राधिका शर्मा की प्री-मैच्योर डिलीवरी के बाद नवजात को वेंटिलेटर की जरूरत थी। वेंटिलेटर खाली नहीं था। तीन घंटे के बाद नवजात को वेंटिलेटर मिल सका।
केस: 2
फिरोजाबाद के असलम अली के नवजात को बाल रोग विभाग में रेफर किया। यहां वेंटिलेटर खाली नहीं थे। करीब पांच घंटे बाद उसे वेंटिलेटर मिल सका।