सिक्स लेन प्रोजेक्ट की जद में आए सिकंदरा बाजार के दुकानदारों में तनाव बढ़ गया है। शनिवार को कई घरों और दुकानों में लोगों ने खुद ही तोड़ना शुरू कर दिया। शनिवार दोपहर में कई दुकानदारों ने आनन फानन में अपने गोदाम और दुकानों से सामान को शिफ्ट कर दिया। सिकंदरा बाजार संघर्ष समिति के अध्यक्ष दिलीप गिरि का कहना है कि मुआवजा देने से पहले दुकानों को तोड़ना गलत है।
नेशनल हाईवे-2 को सिक्स लेन किए जाने के लिए एनएचएआई को दोनों साइडों में 20-20 मीटर की जगह लेनी है। जिला प्रशासन ने सिकंदरा बाजार के दुकानदारों को इस जद में आने वाले प्रतिष्ठानों और घरों को तोड़ने का अल्टीमेटम दिया है। इससे 500 दुकानदार और गृहस्वामियों के सामने विकराल स्थिति पैदा हो गई है। बाजार में रहने वाले लोगों का कहना है कि तमाम दुकानदार और लोग ऐसे हैं, जिनके पास अपना सामान शिफ्ट करने का कोई दूसरा ठिकाना नहीं है। कुछ लोग ऐसे हैं, जिनके पास अपने प्रतिष्ठान को तुड़वाने की मजदूरी देने तक के पैसे नहीं है। सिकंदरा सब्जी मंडी के सामने कई साल से डेरे लगाकर रहने वाले बंजारों ने भी शनिवार को अपना आशियाना समेटना शुरू कर दिया। वे अपना सामान बैलगाड़ियों पर लादकर ले गए।
कहां जाएं ईदू खां
1940 से सिकंदरा में रहने वाले ईदू खां के दो बेटे और एक बेटी है। उन्होंने बताया कि उनके बेटे की अभी शादी हुई है। सामान को कहां ले जाएं। अगर हमें उजाड़ा जा रहा है तो दूसरे स्थान पर जगह दी जाए। परिवार के लोगों ने रोते हुए कहा कि अगर घर तोड़ा गया तो वे खुले आसमान के नीचे बसर करने को मजबूर हो जाएंगे।