कासगंज में दो समुदाय के बीच हुए सांप्रदायिक बवाल पर राजनीति शुरू हो गई। इस घटना को लेकर भाजपा पर पूर्व मंत्री शिवपाल यादव ने हमला किया है। उन्होंने कासगंज की घटना के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराया है।
कहा कि कासगंज में दंगा एक सोची समझी साजिश के तहत भाजपा ने ही कराया है। वहीं, आरएसएस, बजरंग दल भड़काऊ नारेबाजी करते हैं, जिससे माहौल बिगड़ता है।
अगर कासगंज दंगे में कोई हाथ नहीं है तो योगी सरकार को दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करना चाहिए, जिससे हालात काबू में रहे। उक्त बातें पूर्व मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने कस्बे में एक निजी कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से कही।
उन्होंने यूपी सरकार की ओर से सहकारिता के बारे में लाए गए अध्यादेश की आलोचना करते हुए कहा कि अध्यादेश में प्रावधान किया गया है कि दो बार से अधिक कोई भी एक पद पर नहीं रह सकता है।
इस प्रावधान का सीधा मकसद मुझे सहकारी संघ के अध्यक्ष पद से हटाना है। क्योंकि मैं कई बार इस पद पर रह चुका हूं। पूर्व मंत्री ने कहा कि भाजपा नेताओं और सरकार के मंत्रियों को सहकारिता का कोई ज्ञान नहीं है।
जो चुनाव होने वाले हैं, उसमें भाग लेने के लिए सहकारी समिति का सदस्य होना आवश्यक है, लेकिन भाजपाई बिना सदस्य बने अधिकारियों के पास पहुंचकर चुनाव लड़ने का दावा पेश कर रहे हैं।
एकजुटता से मिलेगी कामयाबी
एक सवाल के जवाब में शिवपाल सिंह ने कहा कि उन्होंने हमेशा पार्टी की ताकत बढ़ाने के लिए काम किया है। नेताजी और पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व से भी कहना है कि सपा में एकजुटता रहना आवश्यक है।
एकजुट रहकर ही पार्टी वर्ष 2019 के आम चुनाव में भाजपा के खिलाफ कामयाबी हासिल कर सकती है। अगर ‘अपनी-अपनी ढपली और अपना-अपना राग’ वाला आलम चलता रहा तो पार्टी फिर मात खा जाएगी।
शिवपाल ने सपा नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि कमजोर नेतृत्व के चलते ही पार्टी का भाजपा सरकार के खिलाफ शनिवार को प्रदेश में आयोजित धरना-प्रदर्शन कार्यक्रम फ्लाप हो गया।