जिस अनाथ आश्रम के आंगन में बचपन गुजरा, युवा होने पर जहां से डोली उठी, उस पर ताला लगने से ये युवतियां आहत हैं। वह चीख-चीख कह रही हैं कि यहां रहने वाले छोटे भाई-बहनों को उनसे दूर मत करो। यही उनका परिवार है। अनाथ आश्रम ही उनका मायका है। उनका दो टूक कहना है कि भले ही अनाथालय की समिति बदल दो लेकिन बच्चों को वहीं रहने दो।
पिछले दिनों अनियमितताओं के बाद यमुनापार स्थित अनाथालय को सील कर दिया था। यहां रहने वाले बच्चे, युवक, किशोरियों, युवक-युवतियों को फीरोजाबाद, कानपुर तथा दूसरे अन्य स्थानों पर शिफ्ट कर दिया गया है। इसको लेकर यहां बचपन गुजार चुकीं युवतियां आक्रोश में हैं।
उनका कहना है कि यदि आश्रम में कुछ गलत हुआ तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए, बच्चों को वहां से क्यों हटाया गया। अपनी इसी मांग को लेकर कई युवतियां अपने बच्चों के साथ गुरुवार को कलक्ट्रेट पहुंची। मगर, राज्यपाल के कार्यक्रम में अधिकारियों के व्यस्त होने के कारण युवतियों की उनसे मुलाकात नहीं हो सकी। घंटों इंतजार के बाद उन्हें खाली हाथ कलक्ट्रेट से लौटना पड़ा।