ऐसे करें पूजा अर्चना
कासगंज के सोरों के ज्योतिषाचार्य पंडित रामबल्लभ ने बताया कि शरद पूर्णिमा के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए। समस्त देवी देवताओं का आह्वान करें और वस्त्र,अक्षत, आसन, पुष्प, धूप, दीप नैवेद्य, सुपारी व दक्षिणा आदि अर्पित करने के बाद पूजा करनी चाहिए।
संध्याकाल में दूध की खीर में घी मिलाकर अर्धरात्रि के समय भगवान को भोग लगाना चाहिए। रात्रि के समय चंद्रमा के उदय होने के बाद चंद्र देव की पूजा करें और खीर का नैवेद्य अर्पित करें। रात में खीर से भरे बर्तन को चंद्रमा की अमृत समान चांदनी में रखना चाहिए और अगले दिन सुबह प्रसाद रूप में सब को बांटना चाहिए।
यह है शुभ समय
शरद पूर्णिमा तिथि 19 अक्टूबर की शाम 7:03 पर शुरू हो गई, जो 20 अक्टूबर रात 8:26 पर समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार शरद पूर्णिमा का व्रत 20 अक्टूबर बुधवार के दिन रखा जाएगा।