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मथुरा: तीर्थ स्थल के रूप में विकसित होगा शनिदेव का धाम कोकलावन, यह है योजना

Sun, 15 Dec 2019 11:39 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
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कोकिलावन धाम - फोटो : अमर उजाला
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भगवान श्रीकृष्ण की लीला भूमि मथुरा में कोसीकलां के निकट शनिधाम कोकिलावन का विकास अब तीर्थ स्थल के रूप में होने जा रहा है। इसके लिए ब्रज तीर्थ विकास परिषद के प्रस्ताव को पीएफएडी ने स्वीकृति प्रदान कर दी है। 836 लाख रुपये की लागत वाले विकास कार्यों को शासन की स्वीकृति मिलना बाकी है। 
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उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद ने कोसीकलां के समीप कोकिलावन में शनिधाम को तीर्थ स्थल के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव शासन को भेजा था। 836 लाख रुपये के इस प्रस्ताव में कोसीकलां-नंदगांव मार्ग से कोकलावन को जोड़ने वाले मार्ग पर सोलर लाइट तथा कोकिलावन परिक्रमा में सोलर लाइट और कोकलावन परिक्रमा का विकास शामिल है। 

यह गोवर्धन परिक्रमा की तर्ज पर तैयार की जाएगी। यहां वाहनों के लिए पक्के परिक्रमा मार्ग और कच्ची परिक्रमा का निर्माण कराया जाएगा। इसके अलावा टॉयलेट आदि सुविधाएं भी प्रस्तावित की गई हैं। इस प्रस्तावित योजना को शासन स्तर पर गठित पीएफएडी ने अनुमोदित कर दिया है। अब शासन की स्वीकृति मिलना बाकी है। 
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प्रत्येक शनिवार पहुंचते है करीब दो लाख श्रद्धालु

पिछले कुछ सालों के दौरान कोकिलावन में शनिदेव के दर्शन करने वालों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। शनिधाम में सबसे अधिक श्रद्धालु एनसीआर से आ रहे हैं। इसमें भी दिल्ली और हरियाणा के श्रद्धालुओं की संख्या सर्वाधिक रहती है। पर्यटन विभाग के आंकलन के मुताबिक यहां प्रत्येक शनिवार को दो लाख श्रद्धालु दर्शन को आ रहे हैं।

शनिधाम से जुड़ी प्रमुख बातें
- दिल्ली-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग दो पर कोसीकलां के निकट स्थित है कोकिलावन
- कोसीकलां से कोकलावन की दूरी करीब 9 किलोमीटर
- कोसीकलां-नंदगांव मुख्य मार्ग से जुड़े संपर्क मार्ग पर तीन किलोमीटर दूर 
- कोकलावन में परिक्रमा मार्ग की लंबाई करीब 3.5 किलोमीटर

ब्रज तीर्थ विकास परिषद मथुरा के सीईआ नगेंद्र प्रताप ने बताया कि शनिधाम कोकिलावन को तीर्थ स्थल के रूप में विकसित करने की 836 लाख के प्रस्ताव को पीएफएडी की स्वीकृति मिल गई है। संभावना है कि शासन की स्वीकृति भी अगले सप्ताह तक मिल जाएगी। इसके बाद काम शुरू हो जाएगा। यहां सोलर प्रकाश व्यवस्था, परिक्रमा मार्ग,जनसुविधाओं पर फिलहाल काम होगा। इसके बाद यहां कुंड का भी सौंदर्यीकरण होगा।
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