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Bhagat Singh: सरदार भगत सिंह का आगरा से गहरा नाता, एक साल रहे थे...नूरी गेट में सीखा बम बनाना

Fri, 27 Sep 2024 09:43 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, आगरा

सार

सरदार भगत सिंह का ताजनगरी आगरा से गहरा नाता रहा। उन्होंने यहां फरारी का एक साल गुजारा था। आगरा के नूरी गेट बम बनाना सीखा, जिसके बाद दोस्त संग असेंबली में बम फेंककर अंग्रेजी हुकूमत हिला दी थी।

 
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भगत सिंह - फोटो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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क्रांतिकारी शहीद भगत सिंह का आगरा से गहरा नाता रहा है। उन्होंने आगरा में फरारी का एक साल गुजारा था। यहां ही बम बनाना सीखा और अपने साथी बटुकेश्वर दत्त के साथ असेंबली (पुराना संसद भवन) में बम फेंककर अंग्रेजी हुकूमत को हिला दिया था। इस बम कांड के लिए बम भी नूरी दरवाजा में बनाए गए थे। उन्हें फांसी की सजा के लिए चलाए गए मुकदमे में आगरा के आठ लोगों ने गवाही दी थी।
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देश के स्वाधीनता आंदोलन में अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले क्रांतिकारी भगत सिंह का जन्म 27 सितंबर 1907 को लाहौर (अब पाकिस्तान) में हुआ था। कई जगह उनके जन्म की तारीख 28 सितंबर भी बताई जाती है। लाहौर षड़्यंत्र मामले में अंग्रेजों की आंख की किरकिरी बने भगत सिंह भेष बदलकर आगरा आए थे।


 

वह 1928 से 1929 करे बीच एक साल से ज्यादा समय तक छात्र बनकर आंदोलन की गतिविधियां चलाते रहे। इस दौरान हींग की मंडी में भरोसीलाल के मकान में भी किराये पर रहे थे। इसी मकान में बम बनाने वाली विस्फोटक सामग्री रखी जाती थी। क्रांतिकारियों ने आगरा में रहने के दौरान कई बम बनाए थे।


 

वरिष्ठ पत्रकार राजीव सक्सेना ने बताया कि आगरा में बनाए गए बम ही केंद्रीय विधानसभा, दिल्ली (अब पुराना संसद भवन) में फोड़े गए थे। उनके साथ बम फेंकने वालों में बटुकेश्वर दत्त शामिल रहे थे। हींग की मंडी के बाद वह नूरी गेट में छन्नामल की हवेली में रहे थे। वह हवेली की पहली मंजिल में रहते थे।

 

इस हवेली में कई अन्य किरायेदार भी उस वक्त रहा करते थे। भगत सिंह पर बनाई गई फिल्म में भी नूरी गेट का जिक्र आता है। सरदार भगत सिंह की स्मृति के रूप में नूरी दरवाजा में उनका स्मारक स्थल है, जिसे हाल में टाइल्स आदि लगाकर संवारा गया है।

 
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समाधि स्थल के पास अंतिम संस्कार
अमर उजाला के 22 जुलाई 1965 के अंक में बम कांड में उनके साथी रहे क्रांतिकारी बटुकेश्वर दत्त के निधन के बाद उनका अंतिम संस्कार पंजाब के फिरोजपुर में उस स्थान पर किया गया, जहां शहीद भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव की समाधियां हैं। अंतिम संस्कार में भगत सिंह की माता 83 वर्षीय विद्यावती और बहन अमृत कौर भी शामिल हुई थीं। रेल से क्रांतिकारी बटुकेश्वर दत्त का शव फिरोजपुर पहुंचा था, जहां तत्कालीन मुख्यमंत्री रामकिशन भी पहुंचे थे। अंतिम दर्शन के लिए हजारों लोगों की भीड़ जमा हुई थी।
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