भाजपा अध्यक्ष अमित शाह बीच की कुर्सी पर बैठ गए। एक तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ थे। दूसरी ओर प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडे। सामने अन्य नेता बैठे थे। शाह ने सबसे पहले हाजिरी ली, यह देखा कि कौन- कौन नेता गैरहाजिर है।
प्रदेश प्रभारी ओम माथुर, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य मौजूद नहीं थे। इसके बाद शाह ने होमवर्क देना शुरू कर दिया। चाहें कार्यकर्ता हो या नेता, सभी को काम दिया। योगी आदित्यनाथ को भी जिम्मेदारी देने से नहीं चूके। उनसे कहा कि सपा-बसपा के गठबंधन को ध्यान में रखकर चलना होगा, दलित और पिछड़ों की योजनाओं पर फोकस करने की जरूरत है।
यह यूपी लोकसभा चुनाव समन्वय समिति की मीटिंग थी। ब्रज, पश्चिम और बुंदेलखंड (कानपुर) प्रांत की 13-13 सीटें हैं। इन सभी क्षेत्र के नेता मौजूद रहे। शाह के पास 2014 के लोकसभा चुनाव और 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा और बसपा को मिले वोटों का ब्योरा था। इनके गठबंधन की सूरत में इनकी ताकत का अंदाजा भी था।
बैठक को संबोधित करते अमित शाह
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उन्होंने समन्वय समिति की मीटिंग में कहा कि हमें 51 प्लस वोट पर काम करना होगा ताकि गठबंधन का पूरा गणित ही बिगड़ जाए।इसके लिए दलित और ओबीसी पर फोकस करना जरूरी है। शाह के रुख से माना जा रहा है कि संगठन में दलित और पिछड़ा वर्ग के कई नेताओं का कद जल्द ही बढ़ सकता है।
शाह ने समिति से कहा कि सांसदों के कामकाज पर भी नजर भी रखनी होगी। अगर किसी सांसद का काम अच्छा नहीं है तो उसकी जगह नया चेहरा उतारना होगा। मीटिंग में मौजूद एक नेता ने कहा कि शाह ने सिर्फ होमवर्क नहीं दिया, यह भी कहा कि उन्हें रिपोर्ट चाहिए कि कौन क्या काम कर रहा है?
विस्तारकों की मीटिंग में उनका जोर जमीनी स्तर पर काम करने पर रहा। आईटी सेल की मीटिंग में फोकस रहा सपा और बसपा पर सोशल मीडिया के जरिए प्रहार करने पर। उन्होंने कहा कि दोनों एक -दूसरे के धुर विरोधी हैं, फिर भी एक हो रहे हैं तो इसके पीछे इनका जो स्वार्थ है, वह जनता के सामन आना चाहिए। शाह ने बूथ पालक और आईटी वॉलियन्टर्स बढ़ाने का टारगेट भी दिया।
गठबंधन की भेंट चढे़ंगे कई सांसदों के टिकट
मीटिंग में सांसदों के कामकाज पर बात हुई, लेकिन विस्तार से नहीं। माना जा रहा है कि जल्द ही प्राइवेट एजेंसियों के माध्यम से सांसदों के कामकाज पर सर्वे कराया जाएगा। इसकी रिपोर्ट से ही सांसदों के टिकट पर निर्णय होगा।
शाह का इशारा साफ है कि गठबंधन का हर स्तर पर मुकाबला करना है। टिकट देने में भी समीकरणों का ध्यान रखा जाएगा। माना जा रहा है कि 2014 के मुकाबले यूपी में दलित और पिछड़ों को ज्यादा टिकट मिलेंगे। इस कारण कई सांसदों के टिकट कट सकते हैं।
अभी तक यही बात सामने आ रही है कि सपा और बसपा के बीच गठबंधन होगा, जबकि कांग्रेस और रालोद को इसमें जगह मिलना मुश्किल है। अमित शाह ने कहा है कि इसमें दिमाग लगाने की जरूरत ही नहीं है कि गठबंधन छोटा होगा या बड़ा, चाहें सपा, बसपा, रालोद और कांग्रेस सभी मिल जाएं तो भी ऐसी रणनीति बनानी है कि गठबंधन चित्त हो जाए।