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सामूहिक दुष्कर्म: करवट भी नहीं ले पा रही पीड़िता, होश आने पर कहा- उन दरिंदों को मत छोड़ना

Thu, 30 Jan 2020 01:53 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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अस्पताल के बाहर पुलिस अफसर - फोटो : अमर उजाला
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आगरा में सामूहिक दुष्कर्म की शिकार छात्रा की हालत गंभीर है। उसकी हालत इतनी गंभीर है कि वो करवट नहीं ले पा रही है। वो बुधवार दोपहर चार से रात नौ बजे तक बेहोश रही। होश में आते ही उसने सबसे पहले मां को पुकारा।
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पीड़ित ने कहा, मां ! मुझे बहुत दर्द हो रहा है.... डॉक्टर को बुलाओ... भइया कहां है... पुलिस कहां चली गई.. ये कहते कहते सामूहिक दुष्कर्म पीड़ित छात्रा सिसकने लगती है। उसकी हालत देखकर मां की आंखों से आंसू गिरने लगते हैं। 

पीड़ित छात्रा ने भाई से कहा, क्या हुआ? वे (आरोपी) पकड़े गए या नहीं? भाई ने कहा, नहीं, पता नहीं कौन हैं? छात्रा को होश आने की सूचना पर पुलिस पहुंच गई। इसके बाद छात्रा ने पूरा घटनाक्रम बताया। 
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'उन दरिंदों को छोड़ना नहीं'

फ्लैट में हुई दरिंदगी की बात बताते हुए वो सिहर गई, उसकी आंखों से आंसू आने लगे। उसने कहा, मेरे साथ बहुत बुरा हुआ है, उन दरिंदों को छोड़ना नहीं, उन्हें सजा मिलनी चाहिए, अगर नहीं पकड़े गए तो कल किसी और को शिकार बनाएंगे।

छात्रा ने बताया कि हैवानियत साजिश के तहत की गई। पहले से तैयारी थी। नशे की दवाई उन्होंने (आरोपियों ने) पहले से ला रखी थी। उसका दोस्त उसे वहां ले गया। उसने ही सबको बुला रखा था। उन्होंने बहुत बुरा किया, मुझे बहुत दर्द हो रहा है। उसने पुलिस से कहा कि उन्हें छोड़ना नहीं।

'मैं गिड़गिड़ाई, पर वे नहीं पसीजे'

छात्रा ने पुलिस को बताया कि जब उसके साथ दरिंदगी होने लगी तो उसे चक्कर आ रहे थे लेकिन मालूम था कि क्या हो रहा है। उसने परिचित युवक से कहा कि प्लीज, उसे छोड़ दे, वो घर जाना चाहती है लेकिन वे नहीं माने। 

उसने उन युवकों के हाथ जोड़े, उनसे कहा कि उनकी बहन भी तो होगी, वो भी उनकी बहन जैसी है लेकिन उनका दिल नहीं पसीजा। छात्रा ने रोते-रोते दरिंदगी का पूरा घटनाक्रम बताया।
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भगवान टॉकीज पर छोड़ गया परिचित

छात्रा ने बताया कि दरिंदगी के बाद जब उसकी हालत बहुत बिगड़ गई तो उन्हें लगा कि कहीं वो मर न जाए। इस पर परिचित युवक को जिम्मेदारी दी गई कि वो उसे घर के पास छोड़ आए। वो डरा हुआ था। उसने ताजगंज से ऑटो लिया। 

ऑटो वाले से कहा कि उसके परिवार की युवती है, बीमार है, डॉक्टर को दिखाना है, भगवान टॉकीज ले चल। भगवान टॉकीज पर उसे उतारा। तब तक हालत बहुत बिगड़ चुकी थी। वो खड़ी भी नहीं हो पा रही थी। 

परिचित ने उसे ऑटो से उतारा और सड़क किनारे बिठा दिया। उसका मोबाइल देकर बोला कि परिवार वालों को बुला ले, वे ले जाएंगे और चला गया। उसे राहगीरों ने अस्पताल पहुंचाया।
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