अनाथालय में दुष्कर्म की घटना के बाद आशा ज्योति केंद्र में रखी गई पीड़िता को सुपुर्दगी में लेने से भाई ने इंकार कर दिया है। अब पुलिस पीड़िता को कोर्ट में पेश करेगी। कोर्ट से युवती को आश्रय दिलाने के लिए अनुमति मांगी जाएगी।
यमुनापार स्थित अनाथालय में रहने वाली युवती ने तीन युवकों पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था। यह मामला तब खुला जब युवती ने यमुना में कूदकर आत्महत्या का प्रयास किया। उसकी जान बच गई थी। पुलिस ने युवती को आशा ज्योति केंद्र में रखा है।
अनाथालय में युवती के दो भाई और दो बहन रह रहे थे। मगर, अनाथालय में सील लगने के बाद उसका परिवार अलग हो गया। एक भाई बालिग होने की वजह से बाहर रहता है। पुलिस ने युवती के भाई से बात की।
बहन को सुपुर्दगी में लेने के लिए कहा, लेकिन उसने मना कर दिया। उसका कहना था कि वह बहन को अपने साथ नहीं रखेगा। थानाप्रभारी निरीक्षक ने बताया कि भाई बहन को सुपुर्दगी में नहीं ले रहा है। इस कारण कोर्ट से युवती को आश्रय दिलाने के लिए पेश किया जाएगा। उधर, पीड़िता के बयानों का भी अवलोकन किया जाएगा।
‘बिल्डिंग ने कौन सा गुनाह किया है डीएम साहब’
अनाथालय को फिर से खोलने के लिए अनशन तीसरे दिन भी जारी रहा। सोशल मीडिया पर भी मुहिम शुरू हो गई है। इस संबंध में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, डा. कुमार विश्वास और नोबेल से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी को ट्वीट कर मदद मांगी गई है।
इसमें तीन दिन तक अनशन पर बैठने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने के बारे में लिखा है। इनका कहना है कि अगर अनाथालय में कुछ गलत हुआ है तो इसके लिए समिति को बदला जाए। लोग डीएम को पत्र भेजकर सवाल कर रहे हैं कि बिल्डिंग ने कौन सा गुनाह किया है।