प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि इंटरसिटी प्लेटफार्म संख्या एक पर रुकी भी नहीं थी, कि यात्री ट्रेन में चढ़ने लगे। इसी दौरान मुख्य लाइन पर आगरा की ओर से दुर्ग संपर्कक्रांति आ गई। इससे बचने के लिए यात्रियों में अफरातफरी मची तो वो इंटरसिटी की बोगियों से टकरा गए।
हादसे में गांव नगरिया सातविसा निवासी थान सिंह, व मेघसिंह की मौके पर मौत हो गई, जबकि राजपाल, कृष्ण निवासी ग्राम नगरिया सातविसा, सुरवारी निवासी संदीप, रीठौरा निवासी दयानंद और नीरज गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया है। गंभीर रूप से घायल संदीप को दिल्ली भेजा है।
स्टेशन पर हादसे के बाद व्यवस्थाओं की पोल खुल गई। दैनिक यात्रियों ने हादसे की सूचना आरपीएफ व जीआरपी को दी। करीब 30 मिनट तक कोई पुलिसकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा। इसके अलावा स्टेशन के बाहर गेट पर यूपी 100 की 1930 गाड़ी में सवार पुलिसकर्मियों से घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए मदद मांगी तो वह गाड़ी लेकर मौके से चले गए।
यात्री अपने स्तर से घायलों को इलाज के लिए नर्सिंग होम लेकर पहुंचे। स्टेशन पर मौजूद रेलवे स्टाफ करीब 20 मिनट बाद स्ट्रैचर लेकर वहां पहुंचा। एंबुलेंस भी काफी देर बाद वहां पहुंची। यात्रियों ने आरपीएफ थाने के बाहर जमकर नारेबाजी की। डायल 100 की गाड़ी जब मौके पर पहुंची तो यात्रियों ने उसे घेर लिया।
चौकी प्रभारी विपिन कुमार काफी देर तक गुस्साए यात्रियों को समझाते रहे। इसके बाद भी यात्रियों का गुस्सा शांत नही हुआ। इंस्पेक्टर अमित कुमार को यात्रियों ने घेर लिया। बाद में कोसी थाने पहुंचे यात्रियों ने रोष जाहिर किया और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की।