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कार्रवाई: विश्वविद्यालय में अंकतालिकाएं जलाने वाले क्लर्क की सेवा होगी समाप्त

Mon, 14 Dec 2020 08:26 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला,आगरा
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में क्लर्क के अंकतालिकाएं जलाने के मामले में कुलपति प्रो. अशोक मित्तल ने कड़ा रुख अपनाया है। रविवार को उन्होंने कुलसचिव डॉ. अंजनी कुमार मिश्र को निर्देश दिया कि क्लर्क वीरेश कुमार की पहले सेवाएं समाप्त की जाएं। इसके बाद जांच समिति बनाकर दो दिन के अंदर रिपोर्ट मांगी जाए। क्लर्क के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराने के लिए कहा गया है।
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कुलपति का कहना है कि बिना किसी अनुमति के क्लर्क की ओर से अंकतालिकाओं को जलाए जाने का मामला बेहद गंभीर है। क्लर्क संविदा पर कार्यरत है, इसलिए सीधे सेवा समाप्त किए जाने की कार्रवाई होनी है। सोमवार को इसका आदेश जारी हो जाएगा। कुलसचिव से यह भी कहा है कि मामले में जांच लटकनी नहीं चाहिए। दो दिन के अंदर जांच कराकर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

जांच कमेटी पता करेगी के क्लर्क के पास इतनी अधिक संख्या में अंकतालिकाएं कैसे रखी हुई थीं। क्लर्क के कक्ष में रखी हुई बाकी अंकतालिकाओं और रिकॉर्ड को देखा जाएगा। कुलपति का कहना है कि प्रकरण में जो भी और दोषी पाया जाता है, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, कुलसचिव का कहना है कि सोमवार को मामले की जांच के लिए कमेटी बनाई जाएगी और क्लर्क के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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क्लर्क का काम बदल चुका था, फिर भी अंकतालिकाएं वापस नहीं कीं
इतिहास विभाग में कार्यरत क्लर्क वीरेश कुमार के पास अंकतालिकाएं नहीं होनी चाहिए थी। संबंधित विभाग के अलावा बीएससी, बीकॉम व अन्य पाठ्यक्रमों की अंकतालिकाएं भी उसके पास थीं। वीरेश पहले अंकतालिकाओं का काम देखता था। एजेंसी से अंकतालिकाएं लाता था। पटल बदलने के बाद भी उसने अंकतालिकाओं को वापस नहीं किया। जबकि अंकतालिकाएं संबंधित सेक्शन में जमा करा देनी चाहिए थीं। यदि किसी वजह से उसने अंकतालिकाओं को वापस नहीं किया तो भी उसे जलाना नहीं चाहिए था। जांच के बाद पता चलेगा कि किस-किस पाठ्यक्रमों की कितनी अंकतालिकाएं उसके पास थीं। अंकतालिकाओं को जलाने के पीछे उसकी मंशा क्या रही।

बीएसए दफ्तर की आग का राज 14 महीने में भी नहीं खुला
बीएसए दफ्तर में आठ अक्तूबर 2019 में लगी आग का राज अब तक नहीं खुल पाया है। फोरेंसिक जांच हो चुकी है। यह भी साफ हो गया कि आग लगाई गई थी, लेकिन यह पता नहीं चला कि किसने लगाई थी। दफ्तर में उन शिक्षकों का रिकॉर्ड था जिनकी बीएड की डिग्री फर्जी होने की जांच चल रही थी। एसएसपी बबलू कुमार ने जांच के लिए टीम गठित की थी। 70 से ज्यादा लोगों के बयान दर्ज किए गए, 50 से ज्यादा के नंबर सर्विलांस पर लगाए गए, लेकिन जांच का नतीजा नहीं निकला। जांच अधूरी होने के कारण दफ्तर का वह कमरा नहीं खुला है जिसमें आग लगी थी।
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