आगरा स्थित हवाई डिलीवरी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (एडीआरडीई) में बनाए गए पैराशूटों का इस्तेमाल देश के महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन के लिए बनाई जा रही पैराशूट आधारित मंदन प्रणाली के लिए किया गया। इन पैराशूटों को एडीआरडीई के वैज्ञानिकों ने तैयार किया था।
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खास बात यह है कि पहले जहां छह महीने की पैक्ड लाइफ वाले पैराशूटों का प्रयोग किया जाता था। वहीं, इस बार बीस महीने की पैक्ड लाइफ वाले पैराशूट्स का प्रयोग किया गया। परीक्षण सफल रहने के बाद अब इन पैराशूट का प्रयोग आने वाले समय में रक्षा क्षेत्र में भी किया जाएगा।
बता दें, रविवार को सतीश धवन स्पेस सेंटर की श्रीहरिकोटा रेंज में रविवार को इसरो ने गगनयान मिशन के लिए पैराशूट आधारित मंदन प्रणाली को परखने के लिए पहला एकीकृत वायु ड्रॉप परीक्षण (आईएडीटी-01) सफलतापूर्वक पूरा किया। टेस्ट के दौरान 4.8 टन के पैराशूट इंटीग्रेटेड क्रू मॉड्यूल को चिनूक हेलीकॉप्टर के माध्यम से 3 किमी की ऊंचाई पर 30 किमी तटीय क्षेत्र के नजदीक गिराया गया। सभी 10 इंटीग्रेटेड गगनयान पैराशूट को त्रुटिरहित रूप से खोला गया।
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परीक्षण के दौरान एपेक्स कवर सेपरेशन, पायरोस, ऑनबोर्ड लॉजिक, पैराशूट और क्रू मॉड्यूल डायनेमिक्स और पैराशूट लोड के मापन का संचालन त्रुटिरहित रहा। वैज्ञानिकों का कहना है कि देश के पहले मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम गगनयान की तैयारियों में यह टेस्ट मील का पत्थर साबित होगा।