आगरा आरटीओ में परमिट के खेल से नियमों की अनदेखी कर स्कूली वाहन दाैड़ रहे हैं। इससे 3 हजार से अधिक वैन और 500 से अधिक ऑटो में नाैनिहाल की जान खतरे में है। चालक क्षमता से अधिक विद्यार्थियों को बैठा रहे हैं तो खुद भी वाहन चलाने के लिए प्रशिक्षित नहीं है। हर बार हादसों के बाद अभियान चलाया जाता है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति ही रह जाती है।
स्कूल वैन के लिए आरटीओ से परमिट लेना होता है। इसमें जिस स्कूल में वैन चलानी होती है, उससे भी एक पत्र लिखवाकर लाना होता है। इसके बाद ही परमिट जारी होता है। ऑटो को स्कूल में चलाने के लिए परमिट नहीं मिलता है। रिकाॅर्ड के मुताबिक, 1186 स्कूल बस और 370 वैन ही पंजीकृत हैं। जानकारों के मुताबिक, 3 हजार से अधिक वैन और 500 से अधिक ऑटो अनाधिकृत रूप से दाैड़ रहे हैं।
इनमें भी नियमों का पालन नहीं होता है। चालक वर्दी नहीं पहनते हैं। नाम पटि्टका भी नहीं लगाते हैं। निर्धारित गति का पालन नहीं होता है। पूर्व में रुनकता में एक वैन पलट गई थी, जिसमें बच्चे घायल हो गए थे। इससे पहले वैन में आग लगने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। आलोक कुमार एआरटीओ प्रवर्तन स्कूलों की वाहनों की चेकिंग के लिए अभियान चलाया जाएगा। स्कूल प्रबंधकों के साथ बैठक की जाएगी।
नहीं होती जांच
परमिट के लिए वैन स्वामी स्कूल का प्रमाण पत्र लगाते हैं। हालांकि जिस स्कूल का प्रमाण पत्र होता है, उसमें शायद ही कोई वैन चलाई जाती है। इसकी जांच भी विभाग की ओर से नहीं की जाती है। क्षमता से अधिक विद्यार्थियों को बैठाने के मामले में भी ध्यान नहीं दिया जाता है। अगर, संख्या कम की जाती है तो चालक किराया बढ़ा देते हैं। ऐसे में अभिभावकों को बोझ बढ़ता है। इस कारण अधिक बच्चे वाहन में बैठाने पर अभिभावक भी चुप ही रहते हैं।