एससी आयोग के अध्यक्ष आगरा के सांसद डा. रामशंकर कठेरिया की कार में सोमवार को रोडवेज बस की साइड लग गई। इस पर सांसद कठेरिया ने एसपी ट्रैफिक एसपी सिंह, सीओ ट्रैफिक राजकुमार गौतम, रोडवेज के रीजनल मैनेजर पार्थसारथी मिश्रा और दो थानों की पुलिस को मौके पर ही बुलाकर उनकी क्लास लगा दी। अधिकारी भी चुपचाप सुनते ही रहे।
बताया गया है कि सोमवार को सुबह करीब 10 बजे डा. रामशंकर कठेरिया एत्मादपुर जा रहे थे। एनएच-2 पर भगवान टाकीज फ्लाईओवर के पास अबुल उलाह की दरगाह के सामने तेजी से रोडवेज की बस गुजरी। कठेरिया की कार में बस की साइड लगी। कार के गेट को नुकसान पहुंचा।
इस पर कठेरिया ने गाड़ी रुकवाई। वहीं से फोन किए। 10 मिनट के भीतर ही एसपी ट्रैफिक और रोडवेज के आरएम पहुंच गए। पुलिस भी आ गई। कठेरिया चाहते थे कि उस बस को तुरंत पकड़ा जाए जिससे टक्कर लगी है।
कार
- फोटो : अमर उजाला
रामशंकर कठेरिया का कहना है कि वह एत्मादपुर की ओर जा रहे थे। भगवान टाकीज फ्लाई ओवर के पास बसें सड़क पर खड़ी करके सवारी भरी जा रहीं थी। इसी दौरान रोडवेज की बस की उनकी गाड़ी टक्कर लगी। इससे गाड़ी के दरवाजे को नुकसान हुआ है। घटना के बाद रोडवेज और पुलिस के अधिकारी पहुंच गए थे। उन्होंने रोडवेज बस का नंबर अधिकारियों के दे दिया है।
परिवहन निगम के आगरा परिक्षेत्र के क्षेत्रीय प्रबंधक पार्थसारथी मिश्रा का कहना है कि सांसद कठेरिया ने उन्हें घटनास्थल पर बुलाया था। जब वह पहुंचे तब तक रोडवेज बस जा चुकी थी। सांसद प्रतिनिधि ने बस संख्या 7216 से टक्कर होना बताया, जोकि फाउंड्री नगर डिपो की थी। बस के चालक ने दुर्घटना होने से इनकार किया है। तय सीमा से ज्यादा गति से गाड़ी चलाने वाले चालकों के विरुद्ध कार्रवाई होगी।
डग्गामारी पर सबकी चुप्पी
मौके पर पहुंची पुलिस
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उधर, एसपी ट्रैफिक एसपी सिंह का कहना है कि सांसद ने घटना की जानकारी दी थी। इस पर वह और सीओ ट्रैफिक राजकुमार गौतम मौके पर पहुंचे थे। न्यू आगरा और हरीपर्वत थाना की पुलिस भी आ गई थी। सांसद ने जो बस बताई थी, वह रोक ली गई थी। उसमें सवारियां होने के चलते उसे जाने दिया गया।
भगवान टाकीज पर डग्गामार बसें खड़ी रहती हैं। यहीं से सवारी भरी जाती हैं। इसके चलते यहां जाम की स्थिति रहती है। ऐसे में कोई वाहन तेजी से गुजरे तो हादसे का खतरा रहता है। आम लोगों के साथ रोज दुर्घटनाएं होती हैं। तब पुलिस और रोडवेज को कोई चिंता नहीं होती। डग्गामारी को बंद कराने केलिए कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। जनप्रतिनिधि भी इस पर खामोश रहते हैं।