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ई-पॉस ने खोला राशन डीलरों का 'घोटाला', हर महीने एक हजार मीट्रिक टन राशन का घपला

Sat, 10 Aug 2019 09:54 AM IST
Abhishek Saxena ज्योत्यवेंद्र दुबे, अमर उजाला, मैनपुरी
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राशन घोटाला - फोटो : file photo
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जिले के राशन डीलर हर माह एक हजार मीट्रिक टन राशन का घोटाला कर रहे थे। ई-पॉस से वितरण शुरू होने के बाद शुरू घोटाले की पोल खुल गई। विभाग अब कोटा डीलरों का डाटा जुटा रहा है। जल्द ही इस मामले में कोटा डीलरों पर गाज गिर सकती है।
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ई-पॉस लागू होने से पहले जिले में 11.93 लाख यूनिट के सापेक्ष छह हजार मीट्रिक टन राशन का आवंटन था। ये राशन गोदामों से राशन डीलरों के यहां जाता था। इसमें राशन डीलर पूरे कोटे को निल दिखा देते थे। अगले माह के लिए फिर से छह हजार मीट्रिक टन की डिमांड भेजी जाती थी।

मई में ई-पॉस लागू होने के बाद जिले के कुल यूनिट घटकर 10.18 लाख रह गए। इसके सापेक्ष जिले को पांच हजार मीट्रिक टन का आवंटन किया गया, लेकिन ई-पॉस से वितरण में राशन का एक बड़ा घोटाला सामने आया। पहले जहां कोटा डीलर राशन का स्टॉक निल दिखाते थे तो वहीं अब कोटा निल करना उनके लिए मुश्किल हो गया है।
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ई-पॉस लागू होने के बाद तीन माह की रिपोर्ट देखें तो जिले के कोटा डीलरों के पास एक हजार मीट्रिक टन से अधिक राशन स्टॉक में बचा। क्योंकि ई-पॉस में राशन निल करना उनके लिए संभव नहीं है। ये स्टॉक सूचना विज्ञान केंद्र की वेबसाइट पर दिखाई दे रहा है।

इस एक हजार मीट्रिक टन राशन में 600 मीट्रिक टन गेहूं और 400 मीट्रिक टन चावल शामिल हैं। मामला पूर्ति विभाग की नजर में चढ़ा तो कोटा डीलरों की जांच शुरू हो गई है। हालांकि विभाग पूरी जांच को गोपनीय बनाए हुए है। जल्द ही मामले में कोटा डीलरों पर कार्रवाई हो सकती है। 

पहले चरण में ये कोटा डीलर निशाने पर 
पूर्ति विभाग की जांच में पहले चरण में ऐसे कोटा डीलर निशाने पर हैं, जिन्होंने आज तक कभी एक भी क्विंटल राशन स्टॉक में नहीं दिखाया है। सूत्रों के अनुसार जिले में 300 ऐसे कोटा डीलरों को चिह्नित किया गया है। जांच के कारण कोटा डीलरों की धड़कनें बढ़ी हुई हैं।

दो करोड़ है राशन की बाजार में कीमत 
प्राथमिक जांच में सामने आए तथ्यों में हर माह 600 मीट्रिक टन गेहूं और 400 मीट्रिक टन चावल का घोटाला किया जा रहा था। गेहूं की बाजार में कीमत 1900 रुपये प्रति क्विंटल है। इसके अनुसार गेहूं की कीमत 1.14 करोड़ और चावल की कीमत 2100 रुपये प्रति क्विंटल के अनुसार 80 लाख के करीब है। ऐसे में इस पूरे राशन की कीमत 1.94 करोड़ के आसपास है। हर माह इतनी धनराशि के राशन का घोटाला बीते एक साल से चला आ रहा है। 
 
राशन वितरण पर एक नजर 
-जिले को पहले राशन का आवंटन-6000 मीट्रिक टन (बिना ई-पॉस के वितरण)
-जिले को अब राशन का आवंटन-5090 मीट्रिक टन (ई-पॉस से वितरण)
-मार्च में राशन वितरण-5965 मीट्रिक टन (बिना ई-पॉस के वितरण)
-अप्रैल में राशन वितरण-5942 मीट्रिक टन (बिना ई-पॉस के वितरण) 
-मई में राशन वितरण-3919 मीट्रिक टन (ई-पॉस से वितरण) 
-जून में राशन वितरण-4021 मीट्रिक टन (ई-पॉस से वितरण)
-जुलाई में राशन वितरण-4173 मीट्रिक टन (ई-पॉस से वितरण)
 
 
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पूर्ति विभाग पर एक नजर 
ग्रामीण क्षेत्र में दुकानें-694
शहरी क्षेत्र में दुकानें-106
पात्र गृहस्थी कार्ड पहले-2.75 लाख 
पात्र गृहस्थी कार्ड अब- 2.56 लाख
अंत्योदय कार्ड- 45984
कुल राशन कार्ड-3.2 लाख 
 
जिला पूर्ति अधिकारी, यूआर खान का कहना है कि पहले राशन डीलर वितरण के बाद राशन का स्टॉक निल दिखाते थे, लेकिन अब ई-पॉस लागू होने से स्टॉक निल नहीं हो रहा है। ऐसे में राशन घोटाले का मामला सामने आया है। इसकी जांच की जा रही है, जांच कर कोटा डीलरों पर कार्रवाई की जाएगी।
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