कासगंज के सोरों-लहरा मार्ग पर निकलतीं कांवड़ियों की टोली
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सोरों(कासगंज)। श्रावण मास का पहला सोमवार 22 जुलाई को है। शिवालयों में कांवड़ चढ़ाने के लिए कांवड़िये बड़ी संख्या में कांवड़ों में गंगाजल लेकर जा रहे हैं। जुबां पर बम भोले के स्वर कांधे पर कांवड़ और तन पर केसरिया वस्त्र। नजारा आकर्षक और बेहतरीन दिखाई दे रहा है। तीर्थनगरी की राहें शिव भक्त कांवड़ियों ने गुलजार कर दी हैं। तीर्थनगरी से लहराघोट तक शिवभक्तों की कतारें लगने लगीं है।
भगवान शिव की पूजा अर्चना के पवित्र माह सावन में भक्ति की लहर चल रही है। दूर दराज के कांवड़िये भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए गंगाजल लेने को गंगाघाट पहुंच रहे हैं। मध्यप्रदेश, ग्वालियर, राजस्थान, भिंड, मुरैना के कांवड़िये इन दिनों तीर्थनगरी में रौनक बढ़ा रहे हैं। पैरों में बंधे घुंघरूओं की झंकार, कांवड़ में बंधी घंटी की धुन, जुबां पर बम भोले के जयकारों से वातावरण गुंजायमान हो रहा है। शिवभक्तों की टोलियां जल भरकर जोश के साथ आस्था के पथ पर आगे बढ़ रहीं हैं। सोरों से साज सज्जा की सामग्री खरीदकर कांवड़िये लहरा घाट पर कांवड़ को सजाते नजर आ रहे हैं। जल भरकर लौटते कांवड़िये सोरों के प्राचीन शिवालयों में मत्था भी टेक रहे हैं। कांवड़ियों की टोलियों में महिलाओं की संख्या भी अच्छी खासी है।
क्या कहते हैं कांवड़िये
500 किलोमीटर दूर मध्यप्रदेश के गांव मेहगौना से कांवड़ भरने आए हैं। भगवान शिव की आराधना करते हुए पैदल चलकर यात्रा तय करेंगे। प्रदीप कुमार।
- मध्यप्रदेश के गांव पिपरौनिया से कांवड़ लेने आए हैं। भगवान शिव की महिमा का गुणगान करते हुए जब राह पर चलते हैं तो पता नहीं चलता कि मंजिल कब पार हो गई। अस्तराम।