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मिट्टी हो रही बीमार: वैज्ञानिकों ने किसानों को दी बड़ी चेतावनी, बताया- अपनाने होंगे कौन से नए तरीके

Wed, 10 Jun 2026 09:54 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

खेत बचाओ अभियान के तहत आयोजित किसान चौपाल में वैज्ञानिकों ने किसानों को मिट्टी की घटती उर्वरता और भूजल संकट के प्रति जागरूक किया। विशेषज्ञों ने रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर जैविक खेती, फसल चक्र और आधुनिक सिंचाई तकनीकों को अपनाने की सलाह दी।
 
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प्रयोगशाला में होती मिट्टी की जांच - फोटो : विभाग
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विस्तार
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मिट्टी की घटती उर्वरता और भूजल संकट को देखते हुए केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा एक जून से 30 जून तक चलाए जा रहे देशव्यापी खेत बचाओ अभियान (मृदा एवं खेत संरक्षण अभियान) के तहत मंगलवार को ब्लॉक फतेहपुर सीकरी के गांव डाबर में किसान चौपाल आयोजित की गई। इसमें कृषि विज्ञान केंद्र बिचपुरी के वैज्ञानिकों ने किसानों को मृदा संरक्षण, जल प्रबंधन और टिकाऊ खेती के उपायों की जानकारी दी।
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उद्यान विशेषज्ञ अनुपम दुबे ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी में मौजूद लाभकारी जीवाणु एवं सूक्ष्मजीवों की संख्या लगातार घट रही है, जिससे भूमि की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। उन्होंने किसानों से संतुलित पोषण प्रबंधन अपनाने की अपील की। शस्य विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. अंकुर त्रिपाठी ने कहा कि मिट्टी एक जीवित तंत्र है और इसके संरक्षण के लिए वैज्ञानिक तथा पारंपरिक कृषि पद्धतियों का संतुलित उपयोग आवश्यक है।

उन्होंने किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर मिट्टी की जांच कराने तथा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर केंचुआ खाद, गोबर की खाद और जीवामृत जैसे जैविक विकल्प अपनाने की सलाह दी। वहीं, पशुपालन विशेषज्ञ धर्मेंद्र सिंह चौहान ने फसल चक्र अपनाने, दलहनी फसलों को खेती में शामिल करने, टपक एवं फव्वारा सिंचाई प्रणाली को बढ़ावा देने तथा पराली न जलाकर फसल अवशेषों का खाद के रूप में उपयोग करने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मिट्टी की सेहत में लगातार गिरावट भविष्य में कृषि भूमि की उत्पादकता को प्रभावित कर सकती है। इसलिए खेत और मिट्टी का संरक्षण किसानों तथा आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए बेहद जरूरी है।
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