सीसीटीवी फुटेज से मिली पुलिस को अहम जानकारी
भरतपुर हाउस कालोनी के मेन गेट पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज बार-बार देख रही पुलिस को इससे पता चला कि संजीव रस्तोगी राजकुमार लालवानी से कुछ कागजात छीनकर भागा था। यही गोलीकांड की वजह मानी जा रही है। वह जब राजकुमार की कोठी में प्रवेश कर रहा था तब उसके हाथ में कागजात नहीं थे। जब पीठ में गोली लगने के बाद बाहर निकला तो कागजात कसकर पकड़ रखे थे। बताया जा रहा है कि इन कागजात पर उसने राजकुमार से उसकी करोड़ो की कोठी अपने नाम लिखवा ली थी।
बता दें, 21 जून की दोपहर लगभग 12:30 बजे गोलीकांड में राजकुमार की मौत हो गई थी। संजीव की पीठ में दो गोलियां लगी थीं। कोठी के बाहर की फुटेज ही पुलिस को मिली है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि अंदर क्या सीन रहा होगा? पुलिस ने बताया कि संजीव ने कोठी में 12:21 बजे एंट्री की। इस दौरान उसके एक हाथ में उसका मोबाइल फोन था, दूसरा खाली। 12:39 बजे गोलियां चलने की आवाज सुनाई दी। इसके एक मिनट बाद 12:40 पर उसका ड्राइवर रवि उसे कार में बैठाकर नर्सिंगहोम ले गया। वह जब कोठी से बाहर निकला तो उसके हाथ में कागजात थे। माना जा रहा है कि ये स्टांप पेपर थे। इन पर उसने गागा के कहने पर राजकुमार से उसकी कोठी अपने नाम लिखवा ली थी। राजकुमार पर डिब्बा कारोबार में घाटे के चलते कर्ज हो गया था।
हैरानी की बात यह है कि उसके नर्सिंगहोम में पहुंचने के बाद पुलिस ने गाड़ी की तलाशी ली। इसमें कागजात नहीं मिले। उससे इस बारे में सवाल किया तो उसने कुछ नहीं बताया।
इसके चलते शक और पुख्ता हो गया। राजकुमार के परिवार को इस बारे में जानकारी नहीं है। पुलिस ने संजीव के बेटे सनी से भी पूछताछ की। माना जा रहा है कि राजकुमार कोठी उसके नाम लिखने के बाद कागजात देना नहीं चाह रहे होंगे, वह इसे लेकर भागा होगा। तभी राजकुमार को गुस्सा आ गया होगा।
क्राइम सीन से यह तो साफ हो ही चुका है कि राजकुमार गुस्से में बेडरूम की अलमारी में रखी रिवाल्वर निकालकर लाए थे। इसके बाद उन्होंने संजीव को गोलियां मारी होंगी।
फुटेज दिखाकर सवाल करेगी पुलिस
एसपी सिटी सुशील घुले से इस बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि कागजात के बारे में जानकारी नहीं मिली है। फुटेज में नजर आ रहे हैं। संजीव के ठीक हो जाने पर उन्हें फुटेज दिखाकर कागजात के बारे में सवाल किया जाएगा।
रिकार्डिंग के लिए ही खरीदा था मोबाइल
गोलीकांड में मारे गए राजकुमार लालवानी का मोबाइल फोन भी गायब है। उनके परिवार का कहना है कि यह फोन उन्होंने बातचीत की रिकार्डिंग के लिए खरीदा था। अपने करीबी लोगों से इसी पर बात करते थे। गागा और राजकुमार लालवानी से भी इसी पर बात होती थी। माना जा रहा है कि संजीव इसे भी उठाकर ले गया था। अगर यह फोन पुलिस के हाथ लग जाता तो सुराग दे सकता था। इसमें संजीव और राजकुमार के बीच हुई बातचीत का रिकार्ड मिल सकता था।
डिब्बे कारोबार के जाल में फंसे हैं 50 हजार कारोबारी
भरतपुर हाउस कांड के बाद डिब्बा कारोबार से जुड़े लोग हुए अंडरग्राउंड
हर किसी के सामने अब नहीं हो रहे सौदे, गुपचुप सुरक्षित पहुंचाए टर्मिनल
रीयल इस्टेट के डूबने के बाद रातों-रात करोड़ों के वारे-न्यारे करने की चाहत में डिब्बा कारोबार के जाल में दर्जनों या सैकड़ों नहीं, बल्कि शहर के 50 हजार से ज्यादा व्यापारी फंस चुके हैं। हर दिन 70 से 80 करोड़ रुपये के सौदे आगरा के व्यापारी डिब्बा कारोबार के जरिए कर रहे हैं। एमसीएक्स के उलट डिब्बा कारोबार से सौदे दिन पर दिन बढ़ते जा रहे हैं और कंगाल होने वालों की तादात भी उसी रफ्तार में बढ़ रही है।
भरतपुर हाउस कांड के बाद डिब्बा कारोबार से जुड़े लोग भूमिगत हो गए हैं और बाजार में भी हर किसी के सामने सौदे नहीं किए जा रहे। बल्केश्वर, सीताराम कालोनी, कमला नगर, रावतपाड़ा, दरेसी, काला महल, घटिया जैसे क्षेत्रों में डिब्बा कारोबार से कई लोग जुड़े हैं। डिब्बा कारोबार से करीब एक हजार टर्मिनल के जरिए काम हो रहा है, वहीं हर दिन 70 से 80 करोड़ रुपये के सौदों को इन्हीं टर्मिनल के जरिए किया जा रहा है। सबसे ज्यादा सोने और चांदी में ही ये सौदे हो रहे हैं।
इससे जुड़े कारोबारियों ने बताया कि रीयल इस्टेट के डूबने के बाद शहर के 50 हजार से ज्यादा लोग डिब्बा कारोबार के जरिए करोड़ों के सौदे कर रहे हैं। हाल ये है कि शहर के बड़े व्यापारी नेताओं के पुत्र तक डिब्बा कारोबार में सौदे करके 10 करोड़ रुपये ठिकाने लगा चुके हैं।
डिब्बा कारोबार की बातें भी हुई बंद
भरतपुर हाउस कांड के बाद किनारी बाजार, जौहरी बाजार, नमक की मंडी, चौबेजी का फाटक समेत बुलियन बाजारों में डिब्बा कारोबार की बातें तक बंद हो गई हैं। गद्दियों पर व्यापारी हर किसी के सामने सौदे तक करने से बच रहे हैं। पर्चियों को भी एकांत में ही ले जाकर बुक किया जा रहा है।