नामी कंपनियां और महंगी दवाएं होने के कारण सामान्य तौर पर इनकी खरीद जल्दी होती है। मोटा मुनाफा मिलने के कारण आसानी से खप भी रही हैं। औषधि विभाग की टीम की महीने भर की जांच में ये रैकेट सामने आया है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब का कहना है कि छापे में नामी कंपनियों की सैंपल दवाएं मिली हैं। साथ ही कई साक्ष्य मिले हैं। जांच पूरी होने के बाद ही रिपोर्ट जारी की जाएगी।
दिल्ली-जयपुर से जुड़ रहे तार
छापे में टीम को सैंपल और एक्सपायर्ड दवाएं दिल्ली और जयपुर से मंगवाने के सुराग मिले हैं। ये नामी कंपनियों की दवाएं हैं। मधुमेह, हृदय रोग, त्वचा रोग, पेट रोग और कॉस्मेटिक की दवाएं अधिकांश हैं। बाजार में इनकी ज्यादा मांग रहती है। ऐसे में टीम दिल्ली और जयपुर भी टीम भेजकर जांच कराएगी।
एक्सपायर्ड दवाओं से मरीजों पर दुष्प्रभाव का खतरा
सहायक आयुक्त औषधि अतुल उपाध्याय ने बताया कि सैंपल की दवाएं कंपनी प्रचार-प्रसार के लिए जारी करती हैं। ये मरीजों को निशुल्क दी जाती हैं। एक्सपायर्ड तिथि के बाद दवा बेअसर हो जाती है। साथ ही इसके दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं। ऐसे में सैंपल-एक्सपायर्ड दवाओं की खरीद-बिक्री गैरकानूनी है। नकली-सैंपल की दवाओं की टोल फ्री नंबर 18001805533 पर शिकायत कर सकते हैं।
ऐसे पकड़ा खेल
औषधि विभाग की टीम ने 21 से 23 मई तक 18 फर्मों पर छापा मारकर नकली, एक्सपायर्ड और सरकारी (सैन्य-ईएसआई अस्पताल की) दवाएं जब्त की थीं। इनकी कीमत करीब दो करोड़ रुपये थी। छापे में प्रिंट को मिटाने वाला केमिकल, प्रिंटर समेत अन्य भी बरामद हुआ था। झूलेलाल मार्केट में दो अवैध गोदाम में भी सैंपल-सरकारी दवाएं मिली थीं। ये ज्योति ड्रग हाउस के संचालक नारायण दास हंसराजानी की थी। फर्म के बिल की जांच करने के बाद टीम ने 12 जून को फिर से छापा मारा। यहां भी कई गोदामों में सैंपल-एक्सपायर्ड दवाएं बरामद की हैं। इससे पहले फरवरी 2026 में औषधि विभाग ने हींग की मंडी मंटोला में एक घर से नामी कंपनी के इन्हेलर के आठ हजार रैपर, प्रिंटर पकड़े थे। आरोपी जुबैर अब तक पुलिस पकड़ में नहीं आया है।
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