आगरा में मुगल बादशाह शाहजहां के साले और वजीर सलावत खां के मकबरे पर ताला लगा हुआ है। इसका प्रचार प्रसार भी नहीं है, इस कारण सैलानी नहीं जाते। ताजमहल, किला, सीकरी सहित अन्य स्मारकों के आस पास ऐसा कोई बोर्ड नहीं लगा है जिस पर सलावत खां के मकबरे तक पहुंचने का रास्ता बताया गया हो।
इस स्मारक में 64 खंभे हैं, इसलिए इसे 64 खंभा भी कहा जाता है। यह आईएसबीटी के सामने की तरफ है। हाईवे से सटा होने के बावजूद इसे देखने सैलानी नहीं जाते हैं। इसके आसपास अवैध निर्माण हो गए। नजदीक जाने पर ही पता चलता है कि यहां स्मारक है।
इतिहासकार राज किशोर शर्मा राजे ने बताया कि सलावत के पास कोषागार का जिम्मा था। वह शाहजहां का चहेता वजीर था। उसके कत्ल के बारे में इतिहास में दो विवरण है। पहले के अनुसार, मारवाड़ के राजकुमार एवं मुगल मनसबदार अमर सिंह राठौर एक बार स्वीकृत अवकाश से अधिक दिनों तक दरबार से गैरहाजिर रहे। इस पर सलावत खां के कहने पर शाहजहां ने उन पर बड़ी रकम का जुर्माना कर दिया। इससे उत्तेजित होकर अमर सिंह ने भरे दरबार में उसका कत्ल कर दिया।