नोट बंदी के बाद संसद और इसके बाहर विपक्षियों के हमले झेल रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने फैसले पर ताजनगरी से मुहर लगवाई है। उन्होंने कोठी मीना बाजार मैदान में हजारों की संख्या में मौजूद लोगों से सीधे संवाद करते हुए कहा, 50 दिन तकलीफ झेलने के लिए वे तैयार हैं या नहीं। जवाब में लोगों ने तमाम परेशानियों को झेलते हुए भी हाथ उठाकर इस तकलीफ के समय में प्रधानमंत्री का साथ देने का वादा किया। जनसमर्थन मिलने से गदगद मोदी भी, सहयोग के लिए गरीब और मध्यम वर्ग का धन्यवाद करना नहीं भूले।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर की रात आठ बजे देशवासियों को संबोधित करते हुए 1000 व 500 के नोट बंद करने की घोषणा की थी। अचानक इस फैसले से शहरवासी ही नहीं, पूरा देश हैरान रह गया। दो दिन यानी 10 नवंबर से जब नोट बदलने और जमा करने के लिए लंबी-लंबी लाइनें लगीं तो प्रधानमंत्री के फैसले पर विपक्षियों ने निशाना साधना शुरू कर दिया। संसद में भी विपक्ष ने उन्हें घेरा। वहां तो वे मौजूद न हो पाने की वजह से विपक्षियों को जवाब नहीं दे पाए लेकिन ताजनगरी में हजारों लोगों से हाथ उठवाकर अपने फैसले को जरूर सही ठहरवाकर विपक्षियों को जवाब दे दिया। घंटों से इंतजार कर रही जनता से जाते-जाते उन्होंने पूछा, 50 दिन आप तकलीफ झेलेंगे। एक सुर में लोगों ने हुंकार भरी, हां झेलेंगे। पीएम का दूसरा सवाल था, बेइमानों के खिलाफ लड़ाई जीतेंगे। जनता ने इसका जवाब भी एक सुर में दिया। कहा, हां जीतेंगे। तीसरा और आखिरी सवाल था, ईमानदारों की रक्षा होनी चाहिए। लोगों ने हाथ उठाते हुए कहा, हां होनी चाहिए। इससे पहले पीएम ने लोगों का विश्वास जीतने के लिए कहा कि ये लड़ाई (काला धन) लंबी है लेकिन गरीबों के लिए लड़ाई लड़ने का आनंद कुछ और होता है। मैं गरीबों और आपके हक के लिए लड़ूंगा। जनता से सीधे संवाद का सिलसिला यहीं नहीं थमा था। बोले, मैंने आपसे 50 दिन मांगें थे या नहीं। इन 50 दिनों में थोड़ी तकलीफ रहेगी, मैंने कहा था या नहीं। इतना बड़ा देश है, इतना बड़ा निर्णय, थोड़ा बहुत कष्ट झेलना पड़ेगा, मैंने कहा था या नहीं। इसके बाद पीएम बोले, मैंने ये निर्णय किसी को परेशान करने के लिए नहीं बल्कि भावी पीढ़ी के भले के लिए लिया है।