आठ नवंबर को 500-1000 रुपये के पुराने नोट जमा होने के एलान के बाद कारोबार ठप हो गया और ग्राहक से लेकर दुकानदार तक बैंकों की कतार में लगे नजर आए। इसका असर सरकारी खजाने में जमा होने वाले टैक्स पर भी पड़ा है। नोटबंदी के बाद वाणिज्य कर विभाग को वैल्यू एडेड टैक्स यानी वैट में 61 फीसदी की कमी आई है। नोटबंदी के बाद आगरा में केवल 39 फीसदी टैक्स ही जमा हो पाया है।
वाणिज्य कर कमिश्नर मुकेश कुमार मेश्राम ने जोनल एडिशनल कमिश्नर से टैक्स में आई कमी पर नाराजगी जताई है। सूबे में जहां लक्ष्य के मुकाबले 46 फीसदी ही वैट जमा हो पाया है, वहीं आगरा में यह बेहद कम है, जबकि आगरा प्रमुख कारोबारी शहर है और बुलियन की बड़ी मंडी है। सूबे में केवल तीन जोन का टैक्स सबसे कम रहा है, जिसमें झांसी में 30 फीसदी, बरेली में 37 फीसदी और आगरा में 39 फीसदी वैट जमा हो पाया। वाणिज्य कर कमिश्नर मुकेश कुमार मेश्राम के मुताबिक, नोटबंदी के बाद बुलियन, ज्वेलरी, इलेक्ट्रानिक गुड्स, मोबाइल, ऑटो मोबाइल, बिल्डिंग मैटेरियल में जबरदस्त खरीद-बिक्री हुई। पुराने नोटों से आठ नवंबर के बाद बिक्री की गई लेकिन वाणिज्य कर अधिकारी न तो इन पर नजर रख पाए और न ही कोई कार्रवाई कर पाए। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि जिले भर के बाजारों में डीलरों और रिटेलरों की बिक्री, जमा कर की समीक्षा की जाए। दिसंबर के महीने में नवंबर से टैक्स किसी भी सूरत में कम नहीं होना चाहिए। हर दिन की समीक्षा कर वाणिज्य कर कमिश्नर ने आगरा से रिपोर्ट मांगी है।
आयकर विभाग वालों से ही ले लें ब्योरा
वाणिज्य कर कमिश्नर मुकेश मेश्राम ने सोमवार को समीक्षा के बाद निर्देश दिए कि विमुद्रीकरण के बाद इनकम टैक्स, सेंट्रल एक्साइज विभाग जिन व्यापारिक फर्मों पर छापेमारी कर रहे हैं, वाणिज्य कर विभाग उन दोनों विभागों से संपर्क कर फर्मों की वैट देयता की जांच करे। नोटबंदी के तुरंत बाद ज्वेलर्स, मोबाइल, फर्नीचर, बिल्डरों ने खरीद-बिक्री ज्यादा की लेकिन आयकर विभाग ने उनसे सभी ब्योरा तलब किया। ठीक उसी तरह वाणिज्य कर अधिकारी भी वैट की जांच करें। बिजली विभाग में पुराने नोटों से बिल ज्यादा जमा हुए हैं। वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के द्वारा जमा ऐसे बिलों का ब्योरा लेकर जांच की जाए ताकि वैट का आकलन किया जा सके।
केस निपटाने में वाणिज्य कर फेल
आगरा के एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-1 वीबी सिंह पर वाणिज्य कर विभाग कार्रवाई कर चुका है, लेकिन विभाग के हालात सुधरे नहीं। विभाग में 11,711 केस लंबित हैं, जिनमें सबसे ज्यादा सहारनपुर, आगरा, वाराणसी, गाजियाबाद, मुरादाबाद, अलीगढ़ में सबसे ज्यादा केस लंबित हैं। 2014 के केस 2016 तक जारी रहने पर कमिश्नर ने नाराजगी जताई।