महेंद्र अरिदमन सिंह की कैबिनेट मंत्री पद से बर्खास्तगी की वजहों पर सियासी बहस छिड़ गई है। कुछ लोग कह रहे हैं कि उनके विरोधियों ने उनका खेल बिगाड़ा है तो कुछ इसकी वजह उनकी भाजपा से नजदीकियां बढ़ने की अटकलें बता रहे हैं। हालांकि उन्होंने फिलहाल कोई भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया है।
2012 में उन्होंने सपा का दामन तो थाम लिया लेकिन भाजपा और गृहमंत्री राजनाथ सिंह से नजदीकियों को लेकर अक्सर चर्चा में रहे। उन्हीं समर्थक यह कहते नजर आते हैं कि सपा की संस्कृति में ‘राजा साहब’ खुद को ढाल नहीं पा रहे। वे सपा से पहले प्रदेश में भाजपा की सरकारों में भी मंत्री रहे।
पिछले कुछ समय से चर्चाएं तैर रहीं थीं कि 2017 के चुनाव में उनकी भाजपा में वापसी हो सकती है। कुछ लोग तो यहां तक कह रहे थे इस बार वे अपने पुत्र त्रिपुरदमन सिंह को भी राजनीति में प्रोजेक्ट कर सकते हैं। इसके लिए भाजपा का प्लेटफार्म उनके लिए मुफीद होगा।
दूसरा कारण, सपा की सोशल इंजीनिरिंग का नया फार्मुला मानी जा रही है। ऐसी जानकारी आ रही है कि 2017 का समीकरण देखते हुए क्षत्रिय नेताओं की लालबत्ती कम करके पिछड़ों की बढ़ाई जाएंगी। अरिदमन सिंह को सपा के क्षत्रिय विधायकों के गुट में शामिल बताया जाता है।