इंतजार ही रहा। पाकिस्तान से 15 साल बाद भारत लौटी गीता गुरुवार को ताजमहल देखने नहीं आ सकीं। पाकिस्तान में देखभाल करने वाले ईधी फाउंडेशन के तीन सदस्य गीता के बिना ही सुबह 11 बजे ताजमहल आए। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के साथ आए इन सदस्यों ने ताज का दीदार किया। उन्होंने बताया कि गीता की केयर टेकर बिल्किस बानो की तबियत खराब हो गई, इस कारण वह भी न आ सकीं।
ईधी फाउंडेशन की रिजवाना, मो. शाद व एक अन्य सदस्य के साथ आईं, लेकिन उनके साथ गीता नहीं थी। इंदौर में रह रही गीता को अपनी केयर टेकर रही बिल्किस बानो के साथ आना था।
यात्रा के दौरान वही मूक-बधिर गीता की हर जरूरत पर मदद करती हैं। रिजवाना ने कहा कि ताजमहल देखने का उनका सपना पूरा हुआ। ताज आकर उन्हें बहुत अच्छा लगा।
राजनीतिक सवालों पर चुप्पी साधे रही रिजवाना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एक करोड़ रुपये दान के एलान पर कहा कि वह ‘डोनेट’ कर दिया गया। हालांकि इससे पहले खबर आई कि फाउंडेशन ने डोनेशन लेने से इनकार कर दिया।
रिजवाना ने बताया कि एक करोड़ रुपये ‘डोनेट’ कर दिए गए हैं। यह रकम किसे दी गई, इसका जबाव ईधी सदस्यों ने नहीं दिया।
सीआईएसएफ ने मीडिया को बात करने से रोका
ताजमहल में यदि केंद्रीय मंत्री आ जाएं तो नियम बदल जाते हैं। तब न एएसआई एक्ट याद आता है और न दूसरे नियम। ईधी फाउंडेशन के सदस्यों के आने पर में से एक रिजवाना से जब मीडियाकर्मियों ने बातचीत कर ही रहे थे कि सीआईएसएफ जवानों ने उन्हें रोक दिया। कहा, ताजमहल के अंदर ऐसे इंटरव्यू पर रोक है। पूछने पर बताया कि रोक एएसआई ने लगाई है। लिखित आदेश हालांकि नहीं दिखा सके। चंद दिन पहले ही केंद्रीय संचार मंत्री रवि शंकर प्रसाद, केंद्रीय राज्यमंत्री रामशंकर कठेरिया और केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री डा. महेश शर्मा ताजमहल के रेड सैंड स्टोन प्लेटफार्म पर इलेक्ट्रानिक मीडिया को इंटरव्यू दे चुके हैं। तब उन्हें रोकने कोई नहीं आया था।