सात पासपोर्ट साइज फोटो, आधार कार्ड की कॉपी, दो हजार रुपये फीस और तैयार हो गई सोसाइटी। आवास विकास कॉलोनी सेक्टर-12 स्थित दफ्तर के बाहर सोसाइटी बनाने के लिए दलाल सक्रिय हैं। क्षेत्रीय कार्यालय डिप्टी रजिस्ट्रार फर्म्स सोसाइटीज एवं चिट्स में 1.04 लाख से अधिक सोसाइटी पंजीकृत हैं। जिनके हिसाब-किताब से लेकर प्रबंधन तक में फर्जीवाड़ा हो रहा है।
सोसाइटी एक्ट 163 साल पुराना है। 1860 में बने इस एक्ट में 1978, 1988 में संसोधन हुए, लेकिन नियम-कायदे 163 साल पुराने ही चल रहे हैं। 10 हजार से अधिक वैज्ञानिक शैक्षणिक, धर्मार्थ एवं समाजसेवा के लिए पंजीकृत सोसाइटी में वित्तीय अनियमितताएं हो चुकी हैं। सोसाइटी एक्ट के तहत खेलकूद, अपार्टमेंट, शैक्षणिक, धर्मार्थ व अन्य कार्यों के लिए कितनी सोसाइटी हैं, इसका कोई लेखाजोखा डिप्टी रजिस्ट्रार दफ्तर में मौजूद नहीं है। यहां, हर फाइल पर एक नंबर है। उस नंबर से ही सोसाइटी की पहचान हो सकती है। एक्ट की धाराएं भी सोसाइटियों में चल रहे फर्जीवाड़े के कारण कुंद पड़ रही हैं। बड़े पैमाने पर सोसाइटियों की प्रबंध समितियों में गड़बड़ियां हैं। जिनकी जांच वर्षों से फाइलों में धूल खा रही है।
गलत तथ्य, फर्जी प्रपत्रों से फर्जीवाड़ा
प्रत्येक सोसाइटी को पांच साल बाद नवीनीकरण कराना पड़ता है। गलत तथ्य व फर्जी प्रपत्रों से पंजीकरण से लेकर नवीनीकरण तक में फर्जीवाड़ा हो रहा है। शिकायतों के बावजूद सोसाइटी के कलापों का निरीक्षण नहीं होता। कागजों में कालातीत हो चुकी सोसाइटी पर आपत्तियों के बाद भी पंजीकरण निरस्त नहीं होते।
यहां करें शिकायत
- सोसाइटी नियमावली के उल्लंघन पर शिकायत या आपत्ति डिप्टी रजिस्ट्रार दफ्तर में दर्ज करा सकते हैं।
- सोसाइटी प्रबंधकारिणी में चुनाव या विवाद की स्थिति पर सुनवाई एसडीएम या सक्षम अधिकारी स्तर से होगी।
- सोसाइटी के संबंध में किसी भी निर्णय या पंजीकरण निरस्त के लिए अपील व सुनवाई मंडलायुक्त दफ्तर में होगी।