वृंदावन भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य भूमि है। यहां के आकर्षण का केंद्र शुरू से ही यमुना महारानी रही है लेकिन वर्तमान में दशाहीन शासनतंत्र और जनता के जागरूक न होने के कारण नदियां दूषित हो रही हैं।
सोमवार को पत्रकारों से वार्ता करते हुए जगद्गुरु स्वामी निश्चलानंद महाराज ने कहा कि हिंदुओं द्वारा गाय, गंगा और यमुना को लेकर जो अभियान चलाया जाता है, उसमें जो व्यक्ति या संस्थान के लोग शामिल रहते हैं। वह श्रेय लेने के लिए इतने भूखे रहते हैं कि अभियान का मुख्य उद्देश्य ही छूट जाता है। यह भावना किसी भी हिंदू अभियान या आंदोलन को पूरा नहीं होने देती।
उन्होंने कहा कि आज देश में धर्म और अध्यात्म विहीन शासनतंत्र है। हालात इतने खराब हैं कि विकृति को ही शासनतंत्र इस समय संस्कृति मानता है और शासनतंत्र हमारी सनातन संस्कृति के विमुख होकर कार्य कर रहा है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिल्ली में रामलीला के दौरान जूता पहनकर भगवान श्रीराम की आरती उतारे जाने पर उन्होंने कहा कि अगर यह घटना सत्य है, तो बहुत ही गलत है।
देश का प्रतिनिधित्व करने वाले मोदी को ऐसा नहीं करना चाहिए था। श्रीरामजन्म भूमि पर मंदिर निर्माण को लेकर कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी बाजपेयी व नरसिंह राव का दृष्टिकोण मुझे पता था। लेकिन मोदीजी का क्या दृष्टिकोण है मुझे नहीं पता। उन्होंने कहा कि मेरे पास 25 साल पहले से राम मंदिर निर्माण को लेकर योजना थी। लेकिन कभी भी शासन तंत्र ने मुझसे संपर्क नहीं साधा और ना ही आज साध रहे।