राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा है कि नागरिकता कानून से ओसामा के अनुयायियों को भारत में शरण नहीं मिलेगी। इस कानून को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है। स्कूल, कालेजों में इस कानून के बारे में भ्रांतियों को दूर करें। जिम्मेदार देशवासी होने के नाते यह सबकी जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि यह कानून उन लोगों को नागरिकता देने के लिए बना है जो पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में प्रताड़ना के कारण हमारे देश में शरण लिए हुए हैं। इस कानून में अब तक छह बार संशोधन हो चुके हैं। फिर बवाल इस बार क्यों ?
आगरा के सूरसदन प्रेक्षागृह में रविवार को नागरिकता अधिनियम समर्थक मंच की ओर से आयोजित गोष्ठी में मुख्य वक्ता डॉ. कृष्णगोपाल ने कहा कि एनडीए की सरकार में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी इस बिल को लेकर आए थे।
कांग्रेस पर साधा निशाना
उसके बाद यूपीए की सरकार में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नागरिकता बिल का कार्यकाल एक साल से दो बार बढ़ाया। यूपीए की सरकार ने फिर से नागरिकता संशोधन बिल को बढ़ाया था। मगर यूपीए सरकार में नागरिकता बिल केवल धर्म व जाति के आधार पर लाया गया था।
डॉ. कृष्ण गोपाल ने देश के पहले विधि मंत्री डॉ. भीमराव आंबेडकर और पाकिस्तान के पहले विधि मंत्री जोगेंद्रनाथ मंडल का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि मंडल बाद में पाकिस्तान से प्रताड़ित होकर भारत लौट आए।
उन्होंने कहा कि नागरिकता कानून भाषा, जाति या धर्म के आधार पर नहीं बनाया गया है। यह किसी भारतीय की नागरिकता नहीं छीनता है, चाहें वो किसी भी धर्म या जाति का हो। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों में भ्रम है, इसे दूर किए जाने की जरूरत है।
'कानून का सम्मान करें'
इस मौके पर वरिष्ठ अधिवक्ता करतार सिंह भारतीय ने कहा कि हमें नागरिकता कानून संशोधन का सम्मान करना चाहिए। हम सब एक हैं, धर्म के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन विचारों में परिवर्तन नहीं है।
उन्होंने कहा कि हमें इस बात का भी ख्याल रखना होगा कि इस कानून की आड़ में ऐसे लोग देश में नहीं घुस आएं, जो समाज में भय और हिंसा का माहौल पैदा करें। उन्होंने कहा कि विरोध का मतलब हिंसा फैलाना नहीं है।