सरसंघ चालक डॉ. मोहनराव भागवत वृंदावन में एक कार्यक्रम के दौरान
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संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि शिक्षा आदमी के जीवन का अविभाज्य अंग है। जीवन की आवश्यकता जो मानते हैं उसमें अन्न, स्वास्थ्य और शिक्षा ये सबसे प्रमुख हैं। इसके लिए शिक्षा का केंद्र शुरू करना समाज में ये सदा सर्वदा सर्वत्र की आवश्यकता है। इसे पूर्ण करना एक अत्यंत समाज उपयोगी यानि धर्म का काम है। धर्म, धर्म हम कहते हैं वो पूजा में नहीं होता है। धर्म समाज को जोड़ने और समाज को अन्नत करने, आगे ले जाने में होता है। शिक्षा इस कार्य के लिए आवश्यक संस्कार प्रदान करती है।
बुधवार को केशवधाम स्थित नवनिर्मित रामकली देवी सरस्वती बालिका विद्या मंदिर सीनियर सेकेंडरी स्कूल के उद्घाटन अवसर पर सरसंघचालक ने कहा शिक्षा रोजगार परक होनी चाहिए। शिक्षा ग्रहण करने वाले व्यक्ति को इतना आत्मविश्वास मिलना चाहिए कि वो अपने बल-बूते अपने परिवार को चलाते हुए समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को पूरा कर सके। इसलिए शिक्षा स्व का भान देने वाली होनी चाहिए।
स्व भाषा, स्व भूषा, स्वजनों के प्रति गौरव, स्वदेश के प्रति भक्ति मन में पैदा करने वाली होनी चाहिए। इसके माध्यम से आत्मनिर्भर भारत की चर्चा करते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि हम कौन है, हम क्या हैं, हमारा गौरव, हमारी आवश्कता, क्षमता क्या हैं। इन्हें ठीक करते हुए आज के विश्व का मार्ग दर्शन करने वाला एक वैभव सम्पन्न देश का उपक्रम बनाने वाली शिक्षा चाहिए। यह शिक्षा पद्धति भारत के पास थी, जिसे खत्म कर दिया। उन्होंने देश में महिला वर्ग को शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि इसकी सबसे अधिक जरूरत है। एक महिला के शिक्षित होने से उसकी सभी संतानें शिक्षित होंगी। उन्होंने कहा कि मनुष्य की पहली शिक्षक मां है, उसका शिक्षित होना बहुत आवश्यक है।