छत पर सब्जी उगाने वाले लोग लॉकडाउन में बेहद खुश नजर आ रहे हैं। इन्हें सब्जियों की कोई किल्लत नहीं है। कोई सॉइललेस मीडिया में पालक, तोरई उगा रहा है तो कोई ऑर्गेनिक सब्जियां तैयार कर रहा है। कुछ लोग हाइड्रोपोनिक्स गार्डन में केवल पानी और पोषक तत्वों के जरिए सब्जियां उगाकर उनका स्वाद ले रहे हैं। कुछ युवा भी लॉकडाउन में अपने गार्डन को संवारने में जुटे हैं।
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सॉइललेस मीडिया में उगा रहीं सब्जी
विजय नगर कॉलोनी निवासी विभा गुप्ता ने चार साल पहले रूफ टॉप वेजीटेबल गार्डन की शुरुआत की थी। गार्डन की खास बात यह है कि इसमें मिट्टी का प्रयोग नहीं किया गया। उन्होंने गार्डन को मिट्टी के बजाए नारियल की जटाओं का बुरादा (सॉइललेस मीडिया) तैयार करवाया है।
इसमें खाद व अन्य पोषक तत्व भी डाले हैं। पौधे में पानी डालने के लिए ड्रिप इरीगेशन का सहारा लिया है। इन दिनों इन्होंने टमाटर, धनिया, पालक, बैंगन, काशीफल, लौकी, ककड़ी उगा रखी हैं।
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कोको पिट में चमक रहे टमाटर
पुष्पांजलि गार्डन, दयालबाग निवासी कवि रमेश मुस्कान पांच सालों से अपनी छत पर ऑर्गेनिक सब्जियां उगा रहे हैं। वह कीटनाशक का प्रयोग नहीं करते हैं। उन्होंने टमाटर, शिमला मिर्च, करेला, सेम, धनिया, पालक लगा रखा है। सर्दियों में स्ट्रॉबेरी भी उगाई थी।
कोको पिट (नारियल की भुसी) से गार्डन तैयार किया है। इसमें मिट्टी बहुत कम मात्रा में प्रयोग की जाती है। फाइबर के कंटेनर बनवाए हैं। ग्रीन नेट लगवाई है, ताकि सब्जियां खराब न हों। इसमें लागत ज्यादा नहीं, बल्कि मेहनत ज्यादा लगती है।
बिना मिट्टी के पानी पर उगाए पौधे
तनिष्का राजश्री स्टेट, दयालबाग निवासी प्रशांत पचेरीवाला पिछले 20 सालों से एग्रीकल्चर इंडस्ट्री में हैं। इन्होंने सात साल पहले रूफ टॉप वेजीटेबल गार्डन तैयार किया। अभी बेबी कॉर्न, टमाटर, तोरई, करेला, ककड़ी, भिंडी, सेम आदि उगाई है। सर्दियों में गाजर, फूल गोभी आदि सब्जियां भी उगाते हैं। इनके गार्डन की खासियत यह है कि इन्होंने हाइड्रोपोनिक्स (जल संवर्धन) गार्डन तैयार किया है। इसमें केवल पानी और पोषक तत्वों से सब्जियों को उगाया जाता है।
घर की सब्जी होती है स्वादिष्ट
ओल्ड हॉस्टल, सेंट जोंस कॉलेज निवासी मोनिका असवाल लॉकडाउन में अपना समय बागवानी को दे रही हैं। दयालबाग विवि की छात्रा बताती हैं कि घर में उगने वाली सब्जी और बाजार से खरीदी सब्जी के स्वाद में काफी अंतर होता है।
कॉलेज जाने के दौरान वह ज्यादा समय नहीं दे पाती थीं, लेकिन अब वह बगीचे को संवार रही हैं। उन्होंने अपने बगीचे में टमाटर, पालक, पुदीना, धनिया उगा रखा है। भिंडी, मिर्च, तोरई, करेले के पौधे लगाए हैं। सेम के बीज भी डाले हैं।