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Atal Tunnel: ब्रिगेडियर मनोज की वजह से सरकार के बचे 1000 करोड़ रुपये, सुरंग निर्माण में है अहम योगदान

Sat, 03 Oct 2020 12:27 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

  • ब्रिगेडियर मनोज ने तकनीक के जरिए अटल टनल में सरकार के एक हजार करोड़ रुपये बचाए
  • नालों और झरनों के पानी को देख निर्माण कंपनी नया रूट बनाना चाहती थी, दो साल ज्यादा लगते
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अटल सुरंग के निर्माण में ब्रिगेडियर मनोज का अहम योगदान - फोटो : अमर उजाला
जिस अटल रोहतांग टनल का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया है, उसके निर्माण खर्च में आगरा निवासी ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) मनोज कुमार ने विशेष तकनीकी के जरिए सरकार के एक हजार करोड़ रुपये बचे थे। सेना के बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) में मुख्य अभियंता रहे मनोज ने अगर इस तकनीकी का इस्तेमाल न किया होता तो निर्माण कार्य में दो साल और लग जाते। दरअसल, टनल के ऊपर नाले और झरने देख निर्माण कंपनी नया रूट बनाना चाहती थी, लेकिन मनोज इस पर अड़ गए कि तकनीक में परिवर्तन कर इसी रूट से टनल बन सकती है। आखिर में उनकी तकनीक पर ही काम हुआ।
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अटल सुरंग रोहतांग - फोटो : अमर उजाला
रोहतांग में दस हजार फुट पर बनाई गई इस 8.8 किमी लंबी और 10 मीटर चौड़ी टनल से मनाली और लेह के बीच 46 किमी की दूरी कम हो गई है। मनोज ने बताया कि वह 2014 से 2016 तक इस प्रोजेक्ट से जुड़े। दरअसल, जब डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार हुई तो नाले और झरने टनल के रास्ते से काफी ऊपर लग रहे थे, लेकिन जब काम शुरू हुआ तो पता चला कि पहाड़ियों से होते हुए पानी नीचे तक आ रहा है। इससे निर्माण वाली जगह पर कीचड़ रहती थी। ऐसे में टनल कैसे बन सकती थी।
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पूर्व रक्षा मंत्री दिवगंत मनोहर पर्रिकर (फाइल)
मनोहर पर्रिकर ने ठोकी थी पीठ
उस समय मनोहर पर्रिकर रक्षामंत्री थे। कंपनी ने कह दिया कि टनल का नया रूट बनेगा। इसमें एक हजार करोड़ ज्यादा खर्च होता, समय दो साल और लगता। मनोज ने बताया कि उन्हें खुद पर भरोसा था, वह अड़ गए कि इसी रूट पर टनल तैयार हो सकती है, उन्होंने अध्ययन के लिए एक महीने का समय मांगा। उन्होंने और कंपनी के अधिकारियों ने सेना सचिव को प्रस्तुतिकरण दिया। उनकी बात मानी गई।

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ब्रिगेडियर मनोज कुमार - फोटो : अमर उजाला
खास तकनीक से पानी को ऊपर ही रोक दिया
मनोज ने बताया कि न्यू ऑस्ट्रियन टनल मेथड (नएटीएम) का काफी गहराई से अध्ययन कर काम किया। इसमें विशेष किस्म के सीमेंट और कंक्रीट की मदद से नालो और झरनों के पानी को टनल तक आने से रोक दिया। इससे टनल बनाने का रास्ता साफ हो गया। इस पर मनोहर पर्रिकर ने उन्हें शाबाशी दी।
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आगरा में ब्रिगेडियर मनोज को सम्मानित किया गया - फोटो : अमर उजाला
मुश्किल था टनल बनाना, बीस बार गिरा था मलबा
मनोज ने बताया कि टनल का निर्माण बहुत मुश्किल था। करीब बीस बार मलबा गिरा। ऐसे हादसों में जान और माल का बहुत नुकसान होता है लेकिन गनीमत रही कि यहां किसी की जान नहीं गई। उनके रिटायरमेंट के बाद टनल को पानी से बचाने के लिए और भी कई उपाय किए गए।
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