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यमुना एक्सप्रेसवे: खड़ी गाड़ियां बन रहीं हादसे की वजह, रोडवेज ड्राइवर कर रहे 'मनमानी'

Mon, 16 Sep 2019 12:17 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
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यमुना एक्सप्रेसवे - फोटो : अमर उजाला
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आगरा से नोएडा तक 165 किलोमीटर के यमुना एक्सप्रेसवे पर 25 ऐसे स्थान हैं जहां रोडवेज की बस और ट्रक खड़े हो जाते हैं। हादसे भी अमूमन इन्हीं स्थान पर हो रहे हैं। एक्सप्रेसवे पर दौड़ने वाली गाड़ी के चालक की जरा सी चूक हुई कि इन खड़े वाहनों में गाड़ी घुस जाती है।
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यमुना एक्सप्रेसवे अथारिटी के मुताबिक अगर जुलाई से 15 सितंबर तक की बात की जाए तो खड़े वाहनों से 27 गाड़ियां टकरा चुकी हैं, जिसमें 75 से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं। कई बार रात के वक्त ट्रक खराब हो जाते हैं लेकिन उन्हें समय से हटाया नहीं जाता। पता चलता है कि पूरी रात ट्रक वहीं खड़े रह जाते हैं। 
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ऐसे में एक्सप्रेसवे पर दौड़ने वाली किसी गाड़ी के चालक की जरा सी निगाह चूकी या फिर झपकी आई तो हादसा हो जाता है। पहली जुलाई से 15 सितंबर तक इस प्रकार के हादसे ज्यादा हुए हैं। हादसों का वक्त रात को 12 बजे से भोर में 4 बजे तक का ही रहा है। आमतौर पर तेज नींद आने का वक्त भी यही है। 

यमुना एक्सप्रेसवे अथारिटी के मेजर मनीष का कहना है कि यमुना एक्सप्रेसवे पर हमारी पेट्रोलिंग गाड़ियां लगातार घूमती रहती हैं। अगर कोई गाड़ी खड़ी दिखती है तो उसे हटवाने के लिए कहते हैं लेकिन कई बार वाहनों के चालक ही उनसे भिड़ जाते हैं। झगड़े पर उतारू हो जाते हैं।

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रोडवेज के अफसरों को हमने कई दफा लिखा कि ढाबों के किनारे चालक बसों को रोककर खड़े हो जाते हैं। इनसे हादसे हो सकते हैं लेकिन रोडवेज प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया। सड़क किनारे खड़ी होने वाली बसों के फोटो तक हमने भेजे हैं मगर कोई एक्शन आज तक नहीं हुआ।

यमुना एक्सप्रेसवे पर पांच जिले पड़ते हैं। लेकिन पुलिस कहीं की नहीं दिखती। अगर किसी को मदद की जरूरत पड़ गई तो पुलिस को तलाशते ही रह जाएंगे। जबकि कई प्वाइंट पर पुलिस तैनाती के दावे किए जा रहे हैं। कई बार तो घायलों को भी समय से इलाज नहीं मिल पाता है। इलाज न मिल पाने के कारण गंभीर घायल मौके पर ही दम तोड़ जाते हैं।
 
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यह भी जान लीजिए
- यमुना एक्सप्रेसवे-165 किलोमीटर
- छोटे वाहनों की रफ्तार -100 किलोमीटर प्रतिघंटा
- बड़े वाहनों की रफ्तार-60 किलोमीटर प्रतिघंटा
- 25 प्वाइंट ऐसे हैं जहां वाहन खड़े रहते हैं
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