यमुना एक्सप्रेसवे अथारिटी के मेजर मनीष का कहना है कि यमुना एक्सप्रेसवे पर हमारी पेट्रोलिंग गाड़ियां लगातार घूमती रहती हैं। अगर कोई गाड़ी खड़ी दिखती है तो उसे हटवाने के लिए कहते हैं लेकिन कई बार वाहनों के चालक ही उनसे भिड़ जाते हैं। झगड़े पर उतारू हो जाते हैं।
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रोडवेज के अफसरों को हमने कई दफा लिखा कि ढाबों के किनारे चालक बसों को रोककर खड़े हो जाते हैं। इनसे हादसे हो सकते हैं लेकिन रोडवेज प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया। सड़क किनारे खड़ी होने वाली बसों के फोटो तक हमने भेजे हैं मगर कोई एक्शन आज तक नहीं हुआ।
यमुना एक्सप्रेसवे पर पांच जिले पड़ते हैं। लेकिन पुलिस कहीं की नहीं दिखती। अगर किसी को मदद की जरूरत पड़ गई तो पुलिस को तलाशते ही रह जाएंगे। जबकि कई प्वाइंट पर पुलिस तैनाती के दावे किए जा रहे हैं। कई बार तो घायलों को भी समय से इलाज नहीं मिल पाता है। इलाज न मिल पाने के कारण गंभीर घायल मौके पर ही दम तोड़ जाते हैं।