एसएन मेडिकल कॉलेज में ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों में 40 साल से कम उम्र के करीब 22 फीसदी मरीज शामिल हैं, जबकि 25 साल के युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार धूम्रपान, तनाव, मोटापा, अनियमित दिनचर्या और अधूरी नींद जोखिम बढ़ा सकते हैं। स्वस्थ जीवनशैली और समय पर उपचार बेहद जरूरी हैं।
तनाव, धूम्रपान, मोटापा और अधूरी नींद। ये वजह युवाओं को ब्रेन स्ट्रोक का मरीज बना रही है। हालत ये है कि एसएन मेडिकल कॉलेज में ब्रेन स्ट्रोक के 25 साल के मरीज आ रहे हैं। चिकित्सक युवाओं की खराब दिनचर्या और बढ़ते मरीजों पर चिंतित हैं।
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एसएन मेडिकल कॉलेज के न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. गौरव धाकरे ने बताया कि ओपीडी में रोजाना 80 से अधिक मरीज आ रहे हैं। इमरजेंसी में ब्रेन स्ट्रोक के औसतन रोजाना 2-5 मरीज भर्ती हो रहे हैं। इनमें 40 साल से कम उम्र के करीब 22 फीसदी मरीज हैं। इनमें इन खराब आदतों के चलते 25 साल की उम्र में भी ब्रेन स्ट्रोक हुआ है। खानपान और खराब फिटनेस के कारण मोटापा पनपता है।
इससे मधुमेह, कोलेस्ट्रॉल और हाइपरटेंशन की बीमारी बन रही है। ऐसे मरीजों में ब्रेन स्ट्रोक का खतरा तीन गुना है। न्यूरोसर्जरी विभाग के डॉ. मयंक अग्रवाल ने बताया कि मस्तिष्क की नलिकाओं में थक्का जमने से रक्त का संचार रुकने से इस्कीमिक स्ट्रोक कहते हैं। रक्त नलिकाएं फटने से रक्तस्राव होने पर हेमरेजिक स्ट्रोक कहते हैं। इसमें ये खतरनाक स्थिति है। ये दोनों स्थिति बनने पर मरीज विशेषज्ञ के पास पहुंचे तो मरीज की जान बच सकती है।
ये हैं लक्षण
शरीर का एक ओर का हिस्सा कमजोर, सुन्न होना। अचानक तेज दर्द।
चेहरा टेढ़ा होना, मुस्कुराने पर चेहरे का एक हिस्सा नीचे झुकना।
बोलने पर उच्चारण गलत निकलना, बोलने-सुनने में दिक्कत होना।
अचानक आंखों से धुंधला दिखना, दिखाई देना बंद हो जाना।
अचानक चक्कर आने पर शरीर का संतुलन बिगड़ना, गिर जाना।
इन बातों का रखें ध्यान
धूम्रपान, तंबाकू और फास्टफूड से बचें।
मरीज मधुमेह और बीपी की जांच नियमित करें।
6-8 घंटे तक स्वस्थ नींद लें।
45 मिनट तेज गति से चलें, साइकिल चलाएं।
वजन न बढ़ने दें, रोजाना व्यायाम करें।